घराें व घाटों की साफ सफाई की गई। पूजन अर्चन में प्रयोग होने वाली सामग्री की जमकर खरीदारी हुई। इस दौरान घरों में स्वच्छता का विशेष ख्याल रखा जाता है।
छठ पूजा चार दिनों तक चलेगी। पर्व मनाने के लिए बच्चाें से लेकर बुजुर्ग तक खासे उत्साहित हैं। बुधवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत के पारण के साथ पूजा का समापन होगा। श्रद्धालुओं का कहना है इस आयोजन में न तो किसी पुरोहित की आवश्यकता होती है और न ही किसी कर्मकांड की।
लोगों की आस्था और विश्वास का केंद्र बना यह महापर्व रविवार से पूरे जिले में पारंपरिक श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। अपने पाल्यों की समृद्धि और मंगलकामना के लिए होने वाली इस पूजा में पवित्रता का विशेष ख्याल रखा जाता है। उगते सूरज और ढलते सूरज को अर्घ्य देने के साथ ही यह पूजा सम्पन्न होती है।
छठ पूजा का व्रत रखने वाली महिलाएं शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी, जबकि सुबह उगते हुए सूर्य को अर्घ्य समर्पित किया जाएगा। पवित्र सरोवरों और तालाबों के घाटों पर श्रद्धालुओं ने वेदी तैयार कर ली है। छठ पूजा में महिलाओं के साथ ही पूरा परिवार पूजन-अर्चन करता है।
पांच सौ परिवार करते छठ पूजा
मूल रूप से पूर्वांचल वासियों में छठ पूजा का विशेष महत्व दिखाई दे रहा है। जिले में करीब पांच सौ परिवार छठ पूजा करते है। व्रत रखकर अपनी मंगल कामना छठ मईयां से मांगते है। श्रद्धालुओं का कहना है इस पूजा की विशेष मान्यता है। छठ मईया व्रत धारण करने वाले सभी श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूरी करती है।
दुकानों पर उमड़ी भीड़
शनिवार को छठ पूजा से जुड़ी सामग्री की जमकर खरीददारी हुई। पूजा सामग्री की दुकानों पर पूरे दिन गहमागहमी रही। पूजन सामग्री में प्रयोग होने वाले फल सेब, संतरा, अंगूर, कद्दू, अनार, नारियल, अमरूद कच्ची हल्दी, मूली आदि की खूब बिक्री हुई। इस पर्व पर नए वस्त्र धारण करके पूजन अर्चन करने की मान्यता है। इस वजह से कपड़ा दुकानों पर भी भारी भीड़ नजर आई।
छठ पूजा की पूजन विधि
इस महापर्व की शुरुआत रविवार को कद्दू भात से होगी। इस दिन बिना लहसुन-प्याज के और अरवा चावल का भोजन कर नदी के तट पर अथवा नहर, तालाब, घाट के तट पर इस पूजन का शुभारंभ किया जाता है। इसके अगले दिन सोमवार को खरना होगा। जिसमें श्रद्धालु छत्तीस घंटे का उपवास शुरू करेंगे। भगवान को खीर-पूड़ी के साथ ही सभी मौसमी फलों का भोग लगाया जाएगा। अगले दिन संध्या अर्घ्य होगी। जिसमें छह घाटों नदी, नहर, तालाब के तट पर लोग ढलते सूर्य को प्रणाम कर जल का अर्घ्य देंगे। इसके अगले दिन सूर्योदय के समय अर्घ्य और परना होगा। इस दिन उगते सूर्य को प्रणाम कर अर्घ्य देने के साथ ही इस महापर्व का समापन होगा।
इन स्थानों पर की जाती छठ पूजा
शहर के चार प्रमुख स्थानों पर छठ पूजा की जाती है। सबसे ज्यादा चहल-पहल 27 वाहिनी पीएसी के तालाब व गोल्फ ग्राउंड के तालाब पर होती है। पुलिस लाइन के मंदिर में भी छठ पूजा होती है। इसके अलावा ताड़कनाथ मंदिर में सरायन नदी के तट पर श्रद्धालु छठ पूजा करते हैं।
27वीं वाहिनी के तालाब पर कोई तैयारी नहीं
इस साल 27वीं वाहिनी पीएसी के तालाब पर छठ पूजा की कोई तैयारी नहीं की गई है। यहां तालाब सूखा पड़ा है। जबकि चारों ओर गंदगी फैली पड़ी है। यहां के एक पीएसी जवान ने बताया कि पंपिंग सेट खराब होने से पानी भरवाया जाना संभव नहीं है। तालाब में पानी के बगैर छठ पूजा नहीं की जा सकती। शायद इसीलिए यहां साफ-सफाई नहीं कराई गई।
पति के नौक री की मुराद पूरी हुई
मेरे पति की नौकरी में दिक्कत थी। मामला अदालत में पहुंच गया। वर्ष 1996 से छठ पूजा करना प्रारंभ किया। छठ मईया ने मुराद पूरी की और पति की नौक री लग गई। जिसके बाद से पूरा परिवार इस महापर्व में शामिल होता है।
उर्मिला चौधरी
हमारे लिए महापर्व है छठ पूजा
छठ पूजा का हमारे जीवन में महत्व है। हमारे लिए यह महापर्व है। महिलाएं व्रत रखकर धन, संतान की कामना करती है। मुराद पूरी होने पर छठ मईयां को भोग लगाकर धन्यवाद दिया जाता है।
मुन्नी तिवारी
बच्चों से लेकर बुजुर्ग सभी करते पूजा
छह पूजा में पवित्रता का विशेष ख्याल रखा जाता है। इसमें घरों की साफ-सफाई की जाती है। पूजन के दौरान घर में सिर्फ शाकाहारी भोजन ही बनता है। इस पूजा में बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी श्रद्धा भाव से शामिल होते हैं।
सरस्वती देवी