छठ पूजा के तीसरे दिन मंगलवार को श्रद्धालुओं ने तालाब व नदी के तट पर अस्त होते सूर्य को पहला अर्घ्य दिया। इस दिन श्रद्धालु निर्जला व्रत रखते हैं। षष्ठी की सांयकाल बेला में डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही पकवान अर्पित किए गए।
अपने पाल्यों की समृद्धि एवं मंगलकामना के लिए की जाने वाली छठ पूजा में व्रत के दौरान पवित्रता का खास ख्याल रखा जाता है।
छठ पूजा की महत्ता और इसमें लोगों की आस्था का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पूरा परिवार मिलकर पूजन-अर्चन करता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि छठ पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
चार दिवसीय पूजा कार्यक्रम में 72 घंटे का व्रत रखा जाता है। जिसमें 36 घंटे निर्जला व्रत रखने का विधान है। चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत की समाप्ति होती है। छठ पूजा की षष्ठी पर मंगलवार को श्रद्धालुओं ने निर्जला व्रत रखा।
शाम के समय शहर की 27वीं वाहिनी पीएसी व गोल्फ ग्राउंड पर बने तालाब, ताड़कनाथ मंदिर के किनारे सरायन नदी तट पर पहुंचकर श्रद्धालुओं ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया।
फिर गुड़ व आटे का बना पारंपरिक पकवान ठेकुआ, चावल के चूर्ण का बना लड्डू रुपी कसार, नारियल, केला, नींबू, गागल, सुथनी, कच्ची हल्दी, सिंघाड़ा, गन्ना, चना इत्यादि को सूप में रखकर सूर्यदेव को अर्पित किया गया।
इस दौरान पूजा स्थलों पर आस्था का सैलाब हिलोरें मारता दिखा। शहर के अलावा हरगांव, रामकोट, महमूदाबाद आदि स्थानों पर भी छठ पूजा की जा रही है।