तालगांव पुलिस ने मारपीट व दलित एक्ट के मामले में मृतक को ही मुल्जिम बना दिया। मृतक के नाम केस दर्ज होने के बाद परिवारीजनों ने आवाज उठाई तो पुलिस अपनी गर्दन बचाने में जुट गई है। पुलिस ने सारा दोष वादी के सिर पर मढ़ दिया। पुलिस का यह कारनामा चर्चा का विषय बना हुआ है।
हरगांव के खानपुर कैमहरा निवासी बंशीधर ने 23 मई को तालगांव थाने में शहर कोतवाली के बिहारी गंज निवासी आरिफ, रफीक, हफीज व जाकिर के खिलाफ मारपीट की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि 23 मई को आरोपियों ने पीड़ित के पुत्र दिवाकर सिंह, प्रदीप कुमार व विक्रम को तालगांव क्षेत्र के धर्मपुर में जमकर मारा पीटा गया।
रिपोर्ट दर्ज होने के बाद जब इस मामले की जानकारी आरोपी पक्ष को लगी, तब वह पुलिस पर मनमानी कार्रवाई किए जाने का आरोप लगाने लगा। आरोपी पक्ष का कहना है कि उन पर झूठा आरोप लगाया गया है। सबसे बड़ी बात तो ये है कि आरोपियों में जिस रफीक को नामजद किया गया है। उसकी 2014 में मौत हो चुकी है।
मामले में मृतक रफीक के परिवारीजनों ने एसपी को शिकायती पत्र दिया है। उधर, एसओ रवींद्रनाथ राय का कहना है कि पीड़ित ने जो तहरीर दी थी, उसके आधार पर रिपोर्ट दर्ज की गई है। विवेचना में कार्रवाई होगी।