सीतापुर। सदर तहसील के पारा गांव निवासी विजय बहादुर सिंह ने गांव की बंजर भूमि पर दुकान व मकान बनवा लिया था। तहसीलदार न्यायिक कोर्ट ने इस मामले में धारा 67 का वाद योजित कर सुनवाई की। इसके बाद 7 जनवरी को कब्जे को अवैध घोषित कर राजस्व निरीक्षक को इस भूमि से अवैध कब्जा खाली कराते हुए आख्या कोर्ट को उपलब्ध कराने का अंतिम आदेश दिया है।
सदर तहसील के कोरैया उदयपुर गांव निवासी अर्जित शुक्ला ने 24 जून 2025 को तहसीलदार न्यायिक की कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र दिया था। इसमें बताया कि उन्होंने हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में एक पीआईएल नंबर 420/2025 दायर की है। इसमें पारा गांव के तालाब की भूमि गाटा संख्या 279 व बंजर कीभूमि गाटा संख्या 290 पर अनाधिकृत कब्जे को खाली कराने का अनुरोध किया गया है।
इसके सापेक्ष प्रतिवादी पारा गांव निवासी विजय बहादुर सिंह ने हाईकोर्ट को बताया है कि उनका एक वाद धारा 67 के तहत तहसीलदार न्यायिक के कोर्ट में विचाराधीन है। इस पर हाईकोर्ट ने तहसीलदार न्यायिक कोर्ट को धारा 67 के तहत उनके न्यायालय में चल रहे वाद का यथाशीघ्र निस्तारण करने के निर्देश दिए थे। इस पर कोर्ट ने धारा 67 के तहत विचाराधीन वाद संख्या 5221/2025 के सापेक्ष क्षेत्रीय लेखपाल की रिपोर्ट तलब की।
इस पर क्षेत्रीय लेखपाल की आख्या कोर्ट में 29 अप्रैल 2025 को दाखिल हुई। लेखपाल ने कोर्ट को सौंपी अपनी रिपोर्ट में बताया कि पारा गांव की गाटा संख्या 290/0.084हेक्टेयर में से 330 वर्गमीटर भूमि पर विजय बहादुर सिंह ने अनाधिकृत रूप से करीब 3 वर्ष से कब्जा कर रखा है। लेखपाल ने रिपोर्ट दी कि विजय बहादुर सिंह ने बंजर भूमि पर भवन व दुकान बनाकर अवैध कब्जा किया है। इससे ग्राम सभा को 1 लाख 83 हजार 150 रुपये की क्षति हुई है।
इस आधार पर कोर्ट ने सुनवाई की। कोर्ट ने 7 जनवरी को अंतिम आदेश जारी करते अवैध कब्जा खाली करने का आदेश सुनाया। कोर्ट के आदेश के अनुसार बंजर भूमि गाटा संख्या 290/0.084 हेक्टेयर में 330 वर्गमीटर से प्रतिवादी विजय बहादुर सिंह को बेदखल किया गया। वहीं, उनके विरुद्ध क्षतिपूर्ति 1 लाख 83 हजार 150 रुपये और निष्पादन शुल्क दो हजार रुपये आरोपित किया गया। क्षेत्रीय राजस्व निरीक्षक को इस आदेश का अनुपालन कराने का आदेश भी दिया गया।