कत्थे का नमूना 17 साल पहले लिया गया था। राजकीय प्रयोगशाला की जांच में कत्थे में गैम्बियर मिलाए जाने की पुष्टि हुई है। महोली इलाके का यह व्यापारी बिना लाइसेंस के खाद्य पदार्थ बेच रहा था।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के तत्कालीन मुख्य खाद्य सुरक्षाधिकारी एसपी शुक्ल ने आठ मार्च 1999 को महोली इलाके के ग्राम रिछाही निवासी रामशंकर वर्मा के किराने की दुकान पर छापा मारा। यहां पर विभिन्न खाद्य पदार्थों की जांच की।
कत्थे में मिलावट की आशंका होने पर उन्होंने इसका नमूना जांच के लिए बनारस की राजकीय प्रयोगशाला भेजा था। यहां से तीन माह बाद आई रिपोर्ट में गैम्बियर की मिलावट की बात सामने आई। इसकी पुष्टि होने के बाद व्यापारी को सेंट्रल लैब से दोबारा जांच कराने का मौका दिया गया, लेकिन व्यापारी ने आवेदन नहीं किया।
इसके बाद विभाग ने न्यायालय में वाद दायर किया। 17 साल तक लंबी बहस चलती रही। जिस पर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम रुपाली सक्सेना ने व्यापारी को मिलावट का दोषी पाया। उन्होंने एक साल का कारावास व डेढ़ हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया है। व्यापारी बिना लाइसेंस के दुकान चला रहा था।
जिस पर उन्होंने अतिरिक्त छह माह की सजा व एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। हालांकि व्यापारी ने अपना धंधा बंद कर दिया है।