कुछ लोगों ने नौहाख्वानी, मर्सिया पढ़ने के साथ छुरी आदि का मातम करते हुए जलूस निकाला तो कुछ लोगों ने गाजे-बाजे के साथ जुलूस निकाल कर अपने ताजिए सुपुर्दे-खाक किए। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में मोहर्रम के जुलूस निकाले गए। इस दौरान पुलिस प्रशासन भी मुस्तैद रहा।
दसवीं मोहर्रम की सुबह लगभग आठ बजे अंजुमन गुलदस्ता हैदरी का जुलूस शहर के कजियारा इलाके में निकाला गया। जुलूस में बच्चों और नौजवानों ने छूरी, तलवार, खंजर और ब्लेड से अपने जिस्म को लहूलुहान कर मातम किया। जुलूस में अलम व ताबूत शामिल थे। गमी का पर्व मोहर्रम शिया व सुन्नी सभी लोगों ने अकीदत व एहतराम के साथ मनाया।
शहर व आसपास के ग्रामीण अंचलों के लोगों ने कोट मोहल्ला स्थित कर्बला में ताजिए दफन किए।
इस कर्बला में शहर के मोहल्ला कजियारा, शेखसरांय, मन्नी चौराहा, पटिया, लक्ष्मणपुर, इलसिया, आलमनगर, गदियाना, इस्माइलपुर, नैपालापुर, लाल कुर्ती, सदरबाजार, ओबरी, हुसैनगंज, सादिकपुरवा, बाल्दाकालोनी आदि जगहों के ताजिए दफन किए गए। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर जुलूस के साथ भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा।