तंबौर (सीतापुर)। खेत से घर जा रहे दो सगे भाई-बहन रास्ते में एक भट्ठे पर पानी भरे खड्ड में डूब गए। दोनों की मौत हो गई। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर जांच की है। परिवार वालों की मांग पर दोनों बच्चों के शवों का पंचनामा कर उन्हें सौंप दिया गया।
तंबौर थाना क्षेत्र के रायमरोड़ गांव निवासी महेश मंगलवार को गांव के पश्चिम खेत में धान की रोपाई करने गया था। इस बीच उसके दो बच्चे सात वर्षीय जूली व पांच वर्षीय बेटा सोनू भी पहुंच गए। महेश खुद काम करने लगा और बच्चों को घर वापस जाने के लिए कह दिया।
दोनों बच्चे खेत से घर के लिए चल दिए। दोपहर करीब दो बजे जब महेश धान की रोपाई कर घर पहुंचा तो उसे बच्चे नहीं मिले। इस पर उसने परिवार के लोगों से बच्चों के बारे में पूछा तो बताया गया कि बच्चे घर नहीं पहुंचे है। इस पर महेश सहित पूरे परिवार के लोगों ने उनकी तलाश शुरू कर दी।
पहले दोनों बच्चों की गांव में तलाश की गई, लेकिन पता न चलने पर लोग खेतों की ओर ढूंढने निकले। इस बीच दोनों बच्चों के शव घर व खेत के रास्ते में पड़ने वाले एक भट्ठे के पानी भरे खड्ड में उतराते मिले। बच्चों के शव देखकर सभी लोग सहम गए। ग्रामीणों ने दोनों बचों के शव बाहर निकाले और पुलिस को सूचना दी।
खबर पाकर सीओ बिसवां पीयूष कुमार सिंह व एसओ तंबौर अमित सिंह भदौरिया मौके पर पहुंचे। पुलिस ने जांच की। परिवार के लोगों ने पुलिस से दोनों बच्चों के शवों का पोस्टमार्टम न कराने का आग्रह किया। जिसके बाद पुलिस ने दोनों बच्चों के शव परिवार वालों को सौंप दिए। घटना से पूरे गांव में कोहराम मच गया। परिवार वालों का रो-रोकर बुरा हाल है।
इकलौता बेटा था सोनू
महेश के चार बच्चे है। तीन बेटियां सोनम, अंजनि, जूली व एक बेटा सोनू था। इनमें सोनू अपने मां-बाप का इकलौता बेटा था। मंगलवार को हुई इस घटना में महेश का इकलौता बेटा नहीं रहा। अब उसके सिर्फ दो बेटियां सोनम (16) व अंजलि (12) बची हैं।
बंद ईंट-भट्ठे पर था गहरा खड्ड
जिस भट्ठे के गहरे खड्ड के पानी में डूबने से दोनों मासूमों की जान गई है, वह भट्ठा कलीम खां का बताया जा रहा है। इसी भट्ठे के पड़ोस से होकर तंबौर से रायमरोड़ जाने वाली सड़क निकली है। भट्ठे की ईंटों के लिए खोदे गए गहरे खड्ड में पानी भरा था। इसी पानी में डूबने से सोनू व जूली की मौत हुई है।