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बकाया मजदूरी को श्रमिक लगा रहे चक्कर

Wed, 03 Aug 2016 04:54 PM IST
Amarujala Bureau
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मजदूर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मनरेगा मजदूरों का बुरा हाल है। इस योजना में एक तो गांव में श्रमिकों को रोजगार नहीं मिल रहा है। जिन मजदूरों को काम मिल रहा है। उन्हें समय पर मजदूरी नहीं मिल रही है। जबकि योजना में रोजगार पाने वाले श्रमिकों को सात दिन में भुगतान मिल जाना चाहिए।
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मौजूदा वक्त में 12 हजार श्रमिकों का तकरीबन सात करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। बावजूद इसके योजना में मजदूरी करने वाले श्रमिकों को बरसों बाद भी भुगतान नहीं मिल रहा है। उन्हें भुगतान पाने के लिए कार्यालयों की भागदौड़ करनी पड़ रही है।  

गांवों में श्रमिकों को रोजगार मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार ने मनरेगा योजना चला रखी है। योजना में श्रमिकों को सौ दिन का रोजगार मुहैया कराया जाता है। इसके एवज में उन्हें तय मजदूरी भी दी जाती है। यह भुगतान मजदूरों के खातों में भेजा जाना चाहिए, लेकिन नौकरशाही की मनमानी के आगे मजदूर बेबस हैं।
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विभागीय आंकड़ों पर नजर डाले तो मौजूदा वक्त में 12 हजार मजदूरों का तकरीबन सात करोड़ रुपये का भुगतान बकाया है। इनमें  90 लाख रुपये पिछले वित्तीय वर्ष के हैं। यह लोग मजदूरी पाने के लिए सरकारी अफसरों व कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें मजदूरी मिल नहीं रही है। जबकि इन्हें बकाया भुगतान के लिए ऑफिसों की भागदौड़ करते हुए बरसों बीत चुके हैं। 

गलत खाते भुगतान में बने बाधा
मनरेगा मजूदरों के भुगतान में श्रमिकों के खाते गलत होने से भी भुगतान नहीं हो पा रहा हैं। पिछले वित्तीय वर्ष की अधिकांश बकाएदारी इसी का परिणाम हैं, जबकि खातों को फीड कर भुगतान की जिम्मेदारी ब्लॉक स्तर की होती हैं।

39700 मजदूर कर रहे कार्य
जिले में बरसात में कोई असर नहीं हैं। वर्तमान समय में जिले की 733 ग्रामसभाओं में 3473 स्थानों पर 39700 मजदूर मनरेगा के कार्यों को कर रहे हैं, वहीं चालू वित्तीय वर्ष में एक लाख बहत्तर हजार चार सौ आठ श्रमिकों ने कार्य किया है।

बकाया भुगतान की प्रक्रिया तेज  
बरसात से मनरेगा कार्य प्रभावित नहीं हैं। जिले में पर्याप्त स्थानों पर कार्य प्रगति पर हैं। बकाया भुगतान को लेकर तेजी के साथ कार्य किया जा रहा हैं। वेबसाइट में व्यवधान को लेकर कार्य प्रभावित हो रहा हैं इसको लेकर अनुरोध पत्र भेजा जा रहा है।
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दयाराम यादव, उपायुक्त मनरेगा
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