सीतापुर। विकास भवन सभागार में जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई। बैठक में विकास खंडों के माध्यम से संचालित विभिन्न सरकारी और लाभार्थीपरक योजनाओं की प्रगति को परखा गया। जिलाधिकारी ने कड़े रुख में सभी खंड विकास अधिकारियों (बीडीओ) को निर्देश दिया कि वे धरातल पर जाकर योजनाओं का नियमित निरीक्षण करें और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतें।
डीएम ने स्वास्थ्य और पोषण स्तर में सुधार के लिए ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) सत्रों की मॉनिटरिंग पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन सत्रों के दौरान गोद भराई और अन्नप्राशन जैसी आवश्यक गतिविधियां अनिवार्य रूप से आयोजित की जाएं। इसके साथ ही बच्चों के शारीरिक विकास को मापने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर ग्रोध मॉनिटरिंग डिवाइस की उपलब्धता और संचालन की जांच करने के निर्देश दिए।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तथा आंगनबाड़ी केंद्रों में बुनियादी सुविधाओं और भवन मरम्मत की स्थिति सुधारने को भी कहा गया।ग्रामीण विकास को गति देने के लिए पंचायत भवन, सामुदायिक शौचालय, पेयजल और स्वच्छता से जुड़े कार्यों की गुणवत्ता की नियमित रूप से मौके पर जाकर जांच करने के निर्देश दिए गए। गोवंश संरक्षण को लेकर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया।
उन्होंने आदेश दिया कि प्रत्येक बीडीओ हर सप्ताह कम से कम दो गो आश्रय स्थलों का औचक निरीक्षण कर अपनी रिपोर्ट भेजें। निरीक्षण के समय पशु चिकित्सा अधिकारी, पैरावेट, सचिव और ग्राम प्रधान की उपस्थिति अनिवार्य होनी चाहिए। गोशालाओं में सीसीटीवी कैमरे पूरी तरह सक्रिय रहने चाहिए, ताकि मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) कंट्रोल रूम से सीधे निगरानी की जा सके।
बाढ़ की आशंका को देखते हुए डीएम ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के गो आश्रय स्थलों के लिए एडवांस में विस्थापन और चारे का मुकम्मल प्रबंध करने को कहा। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त करने और गोशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए गोबर से दीपक व अगरबत्ती निर्माण की कार्ययोजना पेश करने के निर्देश दिए।
अंत में, उन्होंने अनुशासन का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि कोई भी बीडीओ बिना अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ेगा। बैठक में सीडीओ डॉ. दीक्षा जोशी और सीएमओ अनूप श्रीवास्तव सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।