लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसियों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में बुधवार को जिला मुख्यालय पर कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे और जुलूस निकाला। बाद में प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल को संबोधित एक ज्ञापन जिला प्रशासन को सौंपा।
इसके मार्फत कार्यकर्ताओं पर दर्ज केस वापस लेने व लाठीचार्ज मामले में दोषी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पार्टी के पदाधिकारी व कार्यकर्ता पहले जिला कांग्रेस कमेटी के कार्यालय पर एकत्र हुए। जिसके बाद जिला अध्यक्ष विनीत दीक्षित के नेतृत्व में नारेबाजी करते हुए सड़क पर आ गए।
कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का जुलूस नारेबाजी करते हुए शहर के जीआईसी चौराहा, कोतवाली चौराहा, राजा कॉलेज के करीब से होते हुए लालबाग चौराहे पर पहुंचा। यहां पर कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रदर्शन किया।
इस मौके पर जिलाध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश सरकार की दमनकारी नीति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिस तरह से 17 अगस्त को प्रदेश सरकार के इशारे पर पुलिस ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर लाठियां बरसाईं। उससे उसकी मंशा साफ नजर आ रही है।
सरकार ने दमनकारी नीति का इस्तेमाल करते हुए 5 हजार लोगों पर मनमाने तरीके से रिपोर्ट भी दर्ज की, लेकिन प्रदेश सरकार का यह सोचना गलत होगा कि इस तरह की कार्रवाई से वह कांग्रेस कार्यकर्ताओं का हौसला तोड़ सकती है।
पार्टी गरीबों को न्याय दिलाने, अन्याय व भ्रष्टाचार के खिलाफ हमेशा आवाज उठाती रहेगी। आजाद भारत में दमनकारी नीति को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पार्टी इसलिए दमन विरोधी दिवस के रूप में प्रदर्शन कर रही है।
लालबाग पर प्रदर्शन करने के बाद कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे। यहां पर राज्यपाल को संबोधित ज्ञापन एडीएम सर्वेश कुमार को सौंपा। ज्ञापन में पार्टी नेताओं पर दर्ज मुकदमे को वापस लेने और लाठीचार्ज करने वाले पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
प्रदर्शन में पुष्पा भार्गव, जमुना प्रसाद शर्मा, सुरेश गुप्ता, रईश अहमद, रमेश निषाद, एमएल पांडेय, फरहद बेग सनी, क्षेमेंद्र बाजपेई आदि शामिल थे।