सीतापुर। उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के अध्यक्ष शिवकिशोर गौड़ ने एक आदेश जारी कर महासचिव पद के प्रत्याशी बृजेंद्र कुमार पांडेय के नामांकन को वैध घोषित किया है। बार काउंसिल के इस निर्णय के बाद एल्डर्स कमेटी ने शनिवार को मीटिंग कर 28 मई को प्रस्तावित बार एसोसिएशन के चुनाव को स्थगित करने का निर्णय लिया है।
शुक्रवार को निवर्तमान अध्यक्ष विजय अवस्थी ने बार की आपात बैठक बुुलाकर चुनाव स्थगित करने का आदेश पारित किया था। इसका संज्ञान लेकर एल्डर्स कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद शाहिद हुसैन सिद्दीकी ने चुनाव को स्थगित कर दिया। इससे पूर्व बार काउंसिल की तरफ से जारी आदेश में कहा गया कि एल्डर्स कमेटी ने उनकी वरिष्ठता की गणना बार एसोसिएशन सीतापुर की सदस्यता तिथि से की है। जबकि उनका पंजीकरण वर्ष 2005 में हुआ था। इसलिए बृजेंद्र पांडेय की वरिष्ठता की गणना पंजीयन वर्ष 2005 से की जाएगी। इस हिसाब से उनकी वरिष्ठता 20 वर्ष की हो चुकी है।
काउंसिल ने एल्डर्स कमेटी द्वारा बृजेंद्र पांडेय के पर्चा निरस्तीकरण आदेश को स्थगित कर दिया है। कहा है कि उनका नामांकन महासचिव पद पर मान्य रहेगा। साथ ही कहा कि अधिवक्ता की वरिष्ठता की गणना उसके पंजीकरण तिथि से की जाए न कि बार संघ की सदस्यता के आधार पर हो। इसलिए यदि बार संघ के आधार पर किसी प्रत्याशी का पर्चा निरस्त किया गया हो तो उस पर पुनर्विचार किया जाए। इस आदेश के बाद चुनाव पर संशय के बादल छा गए थे।
अधिवक्ताओं में चर्चा है कि एल्डर्स कमेटी ने चुनाव से पहले नामांकन के नियमों व चुनाव प्रक्रिया की नियमावली को सही ढंग से सबके सामने नहीं रखा। इसी कारण ऊहापोह की स्थिति बनी। अधिवक्ता मनोज श्रीवास्तव ने बताया कि वर्तमान चुनाव में सीतापुर बार एसोसिएशन व सेंट्रल बार एसोसिएशन की सदस्यता को आधार मानकर नामांकन पत्रों की जांच की गई। इसी कारण बृजेंद्र पांडेय की वरिष्ठता को मात्र पंद्रह वर्ष ही आंका गया। इस वजह से उनके साथ ही तीन अन्य लोगों के पर्चे खारिज हुए।
पहले जारी हुई 785 मतदाताओं की सूची, फिर जुड़े 21 नाम
इस वर्ष 212 अधिवक्ताओं को उनके निरंतर प्रैक्टिस न करने को आधार मानकर मतदान प्रक्रिया से बाहर रखा गया। वहीं, इस बार जारी मतदाता सूची में 785 मतदाताओं के नाम सार्वजनिक किए गए। इसके बाद 21 अन्य मतदाताओं को सूची में जोड़ा गया। एसोसिएशन के निवर्तमान अध्यक्ष विजय कुमार अवस्थी ने बताया कि एल्डर्स कमेटी को चुनाव का बॉयलाज ही स्पष्ट नहीं था।