औरंगाबाद (सीतापुर)। केले की खेती इस बार घाटे का सौदा साबित हो रही है। फसल का भाव करीब 60 फीसदी तक कम मिलने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। इससे किसान मायूस हैं। हालांकि, किसान अब नवरात्र से शुरू होने वाले त्योहारी सीजन में भाव बढ़ने उम्मीद लगाए बैठे हैं।
इलाके में बड़े स्तर पर केले की खेती होती हैं। औरंगाबाद, मीरापुर, सहरोइया, करूवामऊ, ब्रह्मावली, संभोल, मनिकापुर, मड़ारी, अरबगंज, लालपुर, असरफनगर आदि गांवों में किसान केले की खेती कर रहे हैं।
किसान अवधेश मौर्य ने बताया कि पिछले वर्ष केले का थोक रेट 1800 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल रहा था। इस बार 700 से 800 रुपये तक ही बिक पा रहा है। लखनऊ व सीतापुर मंडियों से व्यापारी आकर खेत से केला खरीद तो रहे हैं, पर भाव उम्मीद से काफी कम दे रहे हैं।
उन्होंने बताया कि फसल तैयार करने में आने वाली लागत भी महंगाई के चलते काफी बढ़ गई है। एक एकड़ खेत में 1250 पौधे लगाए थे, फसल तैयार होने तक प्रति पेड़ कुल लागत 140 रुपये तक आई है। इस बार नुकसान उठाना पड़ रहा है। किसान शाद बेग ने बताया कि इस बार केले की फसल में लगने वाले रोगों के चलते कीटनाशक और टॉनिक के कई स्प्रे करने पड़े। महंगाई के इस दौर में मजदूरी, खाद, पानी आदि पर लगभग दोगुना तक खर्च बढ़ गया है।
इससे फसल की लागत भी इस बार ज्यादा आई है जबकि पिछले वर्ष की तुलना इस बार फसल के रेट आधे से भी कम मिल रहे है। किसान बबलू ने बताया कि फल मंडियों में केले की आवक ज्यादा होने के कारण भी रेट गिरे हैं। हालांकि, केला उत्पादक किसान राजू, गजराज, जयराम, शंकर आदि को अब नवरात्र और त्योहारी सीजन में केले का अच्छे दाम मिलने की उम्मीद है।