1000 व 500 के नोट बंद होने के 10 दिन गुजर जाने के बाद भी करेंसी की समस्या बनी हुई है। गुरुवार को भी लोगों को कोई खास राहत मिलती नहीं दिखी। बैंक रोज की तरह खुलते ही कंगाल हो गए और एटीएम भी हांफते नजर आए। हालांकि कुछ बैंकों में पहले की अपेक्षा भीड़ कुछ कम दिखी। गुरुवार को बैंकों में 55 करोड़ रुपये ही जमा हो सके। जबकि लोगों ने करीब 15 करोड़ रुपये निकाले।
गुरुवार सुबह होते ही लोग बैंकों व एटीएम मशीनों की तरफ दौड़ पड़े। जिले में मौजूद 325 बैंकों की शाखाएं सुबह 10 बजे खुली, लेकिन इनमें काम बेहद धीमी गति से चलता रहा। महोली में इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक में ग्राहकों को महज 1 से 2 हजार रुपये का ही भुगतान किया जा रहा था।
जिला मुख्यालय पर बैंकों में आने वाले ग्राहकों की अंगुलियों में स्याही का निशान लगाया जा रहा था। स्टेट बैंक में कैश किल्लत के चलते अधिकारी अलाउंसमेंट कर रहे थे कि लोग अपने खातों से कम से कम रकम निकाले। ग्राहकों की भीड़ कम करने के लिए शहर में मौजूद एटीएम चलने का भी तर्क दिया जा रहा था।
जबकि बैंक के बार मौजूद अधिकांश एटीएम या तो बंद नजर आए या फिर तकनीकी खराबी के चलते हांफते रहे। एटीएम न चलने की वजह यहां मौजूद चेस्ट में पर्याप्त मात्रा में कैश न होना भी बताया जाता रहा।
लोग कभी बैंक, कभी एटीएम की तरफ दौड़ लगा रहे थे, लेकिन उन्हें राहत मिलती नजर नहीं आ रही थी। जिले भर के 102 एटीएम मशीनों में महज 30 ही ठीक से काम कर सकीं। कई मशीनें या तो बंद हो गईं या फिर उनमें कैश नहीं था। एटीएम बूथ के शटर गिरने से लोग निराश थे। बैंकों में धीमी रफ्तार की वजह से गुरुवार को 55 करोड़ रुपये ही जमा हो सके।