फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आढ़तियों ने खरीदा गेहूं, सरकारी गोदाम खाली

विज्ञापन
नवीन गल्लामंडी में गेंहू खरीद सेंटर पर पसरा सन्नाटा। - संवाद - फोटो : SITAPUR
विज्ञापन
सीतापुर। सरकार की एमएसपी इस बार किसानों को लुभा नहीं सकी। आढ़तियों ने किसानों का गेहूं खरीद करके भंडार कर लिया। इसकी वजह से सरकारी गोदाम खाली रह गए। इस बार एमएसपी से अधिक मूल्य पर मंडियों में गेहूं बिका। इससे किसानों ने क्रय केंद्रों की तरफ नहीं देखा। आढ़तियों से तत्काल भुगतान हासिल कर लिया। क्रय केंद्रों पर लक्ष्य की आधी खरीद भी नहीं हो सकी।
विज्ञापन

लक्ष्य से महज 3.71 फीसदी ही गेहूं खरीदा जा सका है। अब खरीद बंद होने में महज चार दिन बाकी हैं। केंद्रों पर सन्नाटा पसरा है। जिले में गेहूं खरीदने के लिए पांच क्रय एजेंसियां नामित की गई थी। इन एजेंसियों के 170 केंद्र डीएम ने स्वीकृत किए थे। इनके माध्यम से जिले के किसानों का गेहूं खरीदा जाना था। इस बार जिले को एक लाख 50 हजार एमटी खरीद का लक्ष्य दिया गया था।
इसके लिए सरकार ने एमएसपी तय कर दी। इस बार गेहूं की डिमांड अधिक होने के चलते एमएसपी से अधिक मूल्य पर शुरुआत से ही जिले में गेेहूं बिकता रहा। जब किसानों को मंडियों में अधिक रेट मिलने लगा तो वह क्रय केंद्रों की तरफ जाने से कतराते रहे। इसका फायदा आढ़तियों को मिला।
विज्ञापन

इन लोगों ने किसानों से सीधे संपर्क करके महंगे रेट पर गेहूं खरीद कर गोदाम भर लिए। किसानों को तत्काल भुगतान कर दिया। इससे किसानों को महंगे रेट पर अपनी फसल बेचने का मौका मिला। सरकारी सिस्टम की तमाम दुश्वारियों से उन्हें निजात मिल गई। हालत सरकारी खरीद के बहुत ही खराब रहे। लक्ष्य के सापेक्ष शुक्रवार तक मात्र 5567.24 एमटी ही गेहूं खरीदा जा सका है। यह लक्ष्य के सापेक्ष महज 3.71 फीसदी है।
तमाम जतन रहे फेल
इस बार जिले में 1086 किसानों से गेहूं खरीदा गया है। लक्ष्य पूर्ण करने के लिए खाद्य व विपणन विभाग ने तमाम जतन किए। इसके लिए मोबाइल खरीद की व्यवस्था की गई। अफसरों को जिम्मेदारी दी गई। किसानों को जागरूक किया गया। केंद्रों पर बैठकें की गई। किसानों के घर जाकर उनको केंद्र पर गेहूं लाने व भुगतान की पारदर्शी व्यवस्था की जानकारी दी गई पर किसानों ने क्रय केंद्रों की ओर रुख नहीं किया।
इसका प्रमुख कारण बिना किसी पचड़े के एमएसपी से अधिक दर पर मंडी में गेहूं खरीदा जाना है। कुछ व्यापारियों ने गांवों में जाकर किसानों से खरीद की। इससे उन्हें दोहरा लाभ हुआ। समय और भाड़े की धनराशि बच गई।
जिले में गेहूं खरीदने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे है। किसानों को जानकारी देकर उनको भुगतान कराया जा रहा है। लक्ष्य के सापेक्ष 10 जून तक 3.71 फीसदी खरीद हो सकी है।
- अरविंद कुमार दुबे, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
एजेंसीवार गेहूं खरीद का विवरण
एजेंसी लक्ष्य खरीदा गेहूं
खाद्य विभाग 31000 997.05
पीसीएफ 65000 2731.02
पीसीयू 40000 1557.32
यूपीएसएस 12500 260.95
भारतीय खाद्य निगम 1500 20.90 (एमटी में)
किसानों का बकाया 39 लाख रुपये
जिले में इस बार खरीदे गए गेहूं का किसानों को 1121.80 लाख रुपये का भुगतान किया जाना था। इसके सापेक्ष 1082.68 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इसके बाद अब भी 39.12 लाख भुगतान बकाया है। सर्वाधिक 20 लाख 30 हजार रुपये पीसीएफ संस्था द्वारा किसानों का भुगतान नहीं किया गया है। इस भुगतान के लिए किसान चक्कर काट रहे है। इससे उनको आर्थिक दिक्कतें भी आ रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें