कारण यह है कि इंदिरा आवास योजना में लाभार्थियों का चयन खुली बैठकों में करने के निर्देश हैं। बावजूद इसके रामपुर मथुरा इलाके में योजना में चयन के मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए मानक और पात्रता को भी दरकिनार कर दिया है। बीपीएल सूची के सीरियल को तोड़कर अपात्रों को आवास आवंटित किए जा रहे हैं।
गरीबों को आवास मुहैया कराने के लिए केंद्र सरकार ने इंदिरा आवास योजना चला रखी है। इस योजना में अबकी दफा लाभार्थियों का चयन ग्राम पंचायतों की खुली बैठकों में करने के निर्देश दिए गए हैं। बावजूद इसके ग्राम पंचायत में इस आदेशों का अनुपालन नहीं किया जा रहा है। महज खानापूर्ति की जा रही है।
अपने चहेतों को आवास दिलाने के लिए सारे मानकों को दरकिनार कर दिया है। यह हाल सिर्फ एक ग्राम पंचायत का नहीं है। बल्कि गोंडा देवरिया, समनपुरमाफी, सुर्जनपुर, महिमापुर, तुलसीपुर खरिका, उमरी गनेशपुर, देशी लौकिया सहित अधिकांश ग्राम पंचायतों का है।
इन ग्राम पंचायतों में खुली बैठक के नाम पर महज खानापूर्ति कर अपात्र और अपने चहेतों के नाम सूची में शामिल कर ब्लॉक को भेजी जा रही हैं। कुछ दिनों पूर्व ग्राम पंचायतों में इंदिरा आवासों के आवंटन के समय भी जिम्मेदारों ने गरीबों को छत देने के नाम पर 1500-5000 रुपये तक प्रति लाभार्थी वसूले गये थे।
अवैध वसूली की शिकायत कुछ ग्रामीणों ने बीडीओ तथा तहसील दिवस में दी थी। जांच में शिकायत कर्तापात्र होने के बावजूद ब्लाक अधिकारियों ने कोई कार्यवाही नहीं की। ग्रामीण बुद्धा, गोपाली, रामनरेश, देशराज आदि ने खुली बैठक कर पुन: पात्रों का चयन करवाये जाने की मांग की है।