उच्च न्यायालय के शिक्षा संबंधी फैसले को अविलंब लागू करने की मांग को लेकर मंगलवार को आम आदमी पार्टी ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। उसके बाद मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन प्रभारी सिटी मजिस्ट्रेट बीएन यादव को सौंपा। जिसमें कार्रवाई किए जाने की मांग की गई है।
आम आदमी पार्टी ने कहा कि अफसर का बेटा हो या चपरासी की संतान, सबको शिक्षा मिले एक समान, डॉ. राम मनोहर लोहिया की इस समाजवादी सोच के साथ वर्तमान सरकार सत्ता में आई थी, लेकिन आज निजी कारखानों की तरह संचालित स्ववित्त पोषित, वित्त विहीन विद्यालय केवल धनार्जन के केंद्र बन गए हैं।
अब जब उच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला दिया है तो उसका समाज हित में अविलंब पालन किया जाए। लेकिन सरकार ने याचिकाकर्ता को पुरस्कृत करने के बजाय दंडित किया है।
इससे सपा सरकार की सोच उभरकर सामने आ गई है। आज सरकारी स्कूलों की दुर्दशा के लिए कहीं न कहीं सरकार और ब्यूरोक्रेसी जिम्मेदार है। शिक्षक मिड डे मिल, भवन निर्माण, ड्रेस वितरण, जनगणना, पशु गणना, चुनाव ड्यूटी, जाति गणना आदि कार्य करते हुए शिक्षा ही नहीं दे पा रहे हैं।
तब विद्यालयों में पठन-पाठन की गुणवत्ता जांचने के नाम पर शोषण ही होता है। वैसे भी 'शिक्षा का अधिकार कानून 2009’ आज तक महज कागजों में ही रह गया है।
मांग की कि न्यायालय के फैसले को नए सत्र पर लागू किया जाए। इस मौके पर किशोरी लाल कोरी, आशुतोष बाजपेयी, संदीप पांडेय, ललित किशोर जायसवाल, राजकुमार मिश्रा आदि मौजूद थे।