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देवगवां में आस्था के दिखे अद्भुत रंग

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देवगवां पड़ाव की ओर जाते परिक्रमार्थी। - संवाद - फोटो : SITAPUR
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कुतुबनगर (सीतापुर)। 84 कोसी परिक्रमा में आस्था के अद्भुत नजारे दिखाई दिए। राम धुन में डूबे साधु संत अपनी विविध रूपों से श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे थे। कोई अपनी जटाओं से लोगों को बुला रहा था तो कोई मूछ व अपनी भक्ति के तौर तरीके से श्रद्धालुओं को खींच रहा था। इन साधु संतों को श्रद्धालुओं ने भोजन कराकर आशीर्वाद लिया।
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पौराणिक 84 कोसी परिक्रमा बुधवार को अपने छठे पड़ाव देवगवां पहुंची। साधु संतों के स्वागत में लोग चादर बिछाए नजर आए। जब संतों का देवगवां आगमन हुआ तो पूरा वातावरण जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। हर तरफ विभिन्न रूप धारण किए हुए साधु-संत दिखाई दिए। मौनी दास त्यागी महराज अपनी पांच फिट की जटाओं को खोले हुए दिखे। मौनी दास ने बताया कि परिक्रमा करने का जब भी अवसर मिलता है वे जरूर आते हैं।
मौनी दास की जटाओं को देखने के लिए तमाम श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। इसी तरह मेले में एक संत महराज पूरे शरीर पर भस्म लगाकर लोगों को आशीर्वाद दे रहे थे। भक्त उनके पास आते अपनी समस्या बताते तो वह उस समस्या का समाधान करवाने का विकल्प बताते। इसी तरह कई साधु संत अपनी लंबी मूछों से लोगों को आकर्षित कर रहे थे।
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अव्यवस्थाओं से जूझे परिक्रमार्थी
छठे पड़ाव स्थल पर प्रशासन की उदासीनता से परिक्रमार्थियों को पानी बिजली व सफाई की समस्या से जूझना पड़ा। परिसर में सरसों फसल कटने के बाद उसके अवशेष खड़े रहे। जिसके चलते जगह का अभाव बना रहा। परिक्रमार्थी पड़ाव स्थल पर सफाई न होने व जगह कम होने के कारण पांच किलोमीटर की दूरी में बाग व गांवों में ठहरने को मजबूर रहे।
पड़ाव स्थल पर पेयजल की समुचित व्यवस्था न होने पर परेशान दिखे। एक-एक हैंडपंप पर सैकड़ों लोगों की भीड़ दिखी। अधिकांश टैंकरों में पानी दोपहर को ही खत्म हो गया। उन टैंकरों में दोबारा पानी की व्यवस्था नहीं की गई। बिजली की समस्या को लेकर परिक्रमार्थी मोबाइल चार्ज करने के लिए कुतुबनगर में डेरा डाले रखे।
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