सीतापुर। गंजरी क्षेत्र के रेउसा ब्लॉक में कई किसानों की ओर से अग्निहोत्र भस्म से खेती की जा रही है। फसलों के उत्पादन पर लागत कम आ रही है। साथ ही उत्पादित फसल सेहत के लिए फायदेमंद हैं, इससे औषधि भी बनाई जा रही है।
रेउसा ब्लॉक के आर्गेनिक विलेज सिकौहा में नई पद्धति से खेती की जा रही है। इसमें रासायनिक खाद और कीटनाशकों का प्रयोग नहीं किया जा रहा है। यहां के कई किसान अग्निहोत्र भस्म से खेती कर रहे हैं। वह इसे खाद के रूप में प्रयोग करते हैं। इसके साथ बीजों के शोधन करने और सिंचाई में भी इसका प्रयोग कर रहे हैं। यहां के राज्य पुरस्कृत प्रगतिशील किसान श्वेतांक त्रिपाठी काली हल्दी, जिमीकंद, गेहूं, धान आदि की खेती कर रहे हैं। वह हल्दी से एशेंस के साथ अन्य उत्पाद तैयार कर रहे हैं। यह कई बीमारियों के इलाज में उपयोग की जाती है। यहां के किसान सतीश मौर्य, रामचंद गुप्ता, त्रिलोकी नाथ मौर्य, केशव शुक्ला, श्रीकांत त्रिपाठी सहित अन्य किसान अग्निहोत्र भस्म से खेती कर रहे हैं। श्वेतांक ने बताया अग्निहोत्र भस्म से उत्पादित फसलें स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद हैं। फसलों के उत्पादन में लागत कम लगती है। महंगी रासायनिक खादों और कीटनाशकों के प्रयोग न होने छुटकारा मिलता है। अग्निहोत्र से वातावरण शुद्ध होता है।