सीतापुर। अग्निहोत्र कृषि के प्रशिक्षण से जिले में पर्यावरण संरक्षण की अलख जगी है। मध्य प्रदेश के माधवाश्रम की संचालिका नलिनी माधव की ओर से 100 किसानों को अग्निहोत्र कृषि का प्रशिक्षण देने और 200 किसानों के एक साथ अग्निहोत्र करने से हुई अनुभूति से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
परसेंडी ब्लॉक के कृषि फार्म अमरापुर में प्रत्येक माह अमावस्या को सामूहिक अग्निहोत्र किया जाएगा। इसमें किसानों को विष मुक्त खेती करने के उपाय बताए जाएंगे। प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि आजीविका सखियों सरिता मिश्रा, पूजा वर्मा, ममता, वर्षा, रजनी व अन्य शामिल हुए। सभी को प्रशिक्षण के बाद प्रमाणपत्र व 10 सर्वश्रेष्ठ प्रतिभागियों को ट्राॅफी देकर सम्मानित किया गया।
बच्चों के भविष्य के लिए पानी की बचत जरूरी
कृषि आजीविका सखी बिसवां ब्लॉक की न्योराजपुर निवासी वंदना देवी व आरती देवी ने बताया कि पानी की बचत बहुत जरूरी है। इसका दुरुपयोग न किया जाए। यह बच्चों के भविष्य के लिए आवश्यक है। उन्होंने बताया कि किचन गार्डन बनाकर इसमें घर और रसोई से निकलने वाले पानी और अपशिष्ट का प्रयोग किया जाए। इससे अच्छी सब्जियां पैदा होंगी, जिनका प्रयोग रसोई घर में किया जाए। अग्निहोत्र से घर का वातावरण भी शुद्ध होता है।
अग्निहोत्र का है वैज्ञानिक महत्व
अग्निहोत्र विधि के आध्यात्मिक, पर्यावरणीय और वैज्ञानिक महत्व हैं। यह भारतीय कृषि की आत्मा है। अग्निहोत्र केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि धरती को उर्वर और पर्यावरण को शुद्ध रखने का एक प्राकृतिक माध्यम है।
नलिनी माधव, संचालिका, माधवाश्रम, बैरागढ़, भोपाल, मध्य प्रदेश