सीतापुर। शाहजहांपुर के पुवाया फर्जी मठभेड़ में सजा पाए आरके सिंह की पहली पसंद सीतापुर जनपद था। वह सीओ बनकर बार बार सीतापुर ही आना चाहता था। यही वजह थी कि वह तीन बार सीतापुर में पोस्ट हुआ। सिटी सर्किल उसका पसंदीदा क्षेत्र था। यह सर्किल उसके तैनात होते चर्चा में आ जाती थी।
सीओ के रूप में आरके सिंह के कार्यकाल पर नजर डालें तो सीतापुर वह वर्ष 2005 में पहली बार आया। 20 जुलाई 2005 में सीओ सिटी का पदभार संभाला। करीब डेढ़ वर्ष तक सिटी सर्किल में रहा। 25 मई 2007 को गैर जनपद स्थानांतरण हो गया। कुछ समय बाद आरके सिंह फिर सीतापुर आने के प्रयास में लग गया। वर्ष 2013 में सीतापुर आमद हुई और 31 जुलाई को लहरपुर सर्किल का चार्ज मिला। यह चार्ज उन्हें रास नहीं आया और सात दिसंबर 2013 को आरके सिंह फिर से सिटी सर्किल में तैनात हुआ। हालंाकि इस दौरान अधिक समय तक वह सीतापुर नहीं रुक सका। 21 फरवरी 2014 को उसका स्थानांतरण सीबीसीआईडी में कर दिया गया। यह तबादला आरके सिंह को रास नहीं आया। गत जून माह में आरके सिंह एक बार फिर सीतापुर पहुंचा। प्रयास यह था कि उसे सिटी सर्किल का चार्ज दिया जाए। लेकिन उन दिनों सिटी सर्किल सीओ एसके सिंह के पास था। उनका रिटायरमेंट करीब था। इस वजह से आरके सिंह को दो जुलाई को सिधौली सर्किल का सीओ बनाया गया। 31 अक्टूबर को एसके सिंह सेवानिवृत्त हुए तो आरके सिंह सिंह फिर उक्त सर्किल पाने की जुगत में लग गया। एक नवंबर को एक बार फिर सिटी सर्किल में तैनात हुआ लेकिन ज्यादा दिन रह नहीं पाया। 29 नवंबर को पंजाब की पटियाला कोर्ट ने शाहजहांपुर के पुवाया में फर्जी मठभेड़ मामले में उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया। एक दिसंबर को कोर्ट ने मुठभेड़ को फर्जी बताते हुए आरके सिंह अन्य अधिकारियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। हालांकि 30 नवंबर को ही एसपी ने सिटी सर्किल का चार्ज राम नारायन सिंह को सौंप दिया था।