सीतापुर। परिषदीय स्कूलों के बच्चों को छोड़िए, उन्हें पढ़ाने वाले शिक्षकों का भी ज्ञान अजब-गजब है। बिसवां, एसडीएम ने एक शिक्षक से प्रदेश के राज्यपाल का नाम पूछा तो वह सोच में पड़ गए। ...कई नाम गिना डाले। एसडीएम की भौंहें तनी देख वह बगले झांकने लगे। इस पर उन्हें बच्चों के सामने ही कड़ी फटकार लगाई गई। डीएम के निर्देश पर बुधवार को जिले के 48 स्कूलों में हुए औचक निरीक्षण में कुछ ऐसी ही खामियां उजागर हुईं। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक नदारद मिले तो कहीं बच्चों की उपस्थिति कम थी। 19 प्रशासनिक अफसरों की टीम के निरीक्षण में 50 अध्यापक अनुपस्थित मिले। डीएम ने सभी का वेतन रोकने के निर्देश दिए हैं। छात्र संख्या कम पाए जाने पर संबंधित हेडमास्टरों का भी वेतन रोक दिया गया है।
डीएम ने बुधवार को परिषदीय विद्यालयों का औचक निरीक्षण करने का निर्देश था। इसके लिए सात तहसीलों के उपजिलाधिकारी, तहसीलदार व अतिरिक्त मजिस्ट्रेट लगाए गए। पूरे जिले में एक साथ अभियान चलाया गया। जिसमें विद्यालयों की साफ-सफाई, बच्चों की उपस्थिति, एमडीएम की गुणवत्ता, शौचालय की स्थिति का जायजा लिया गया। 48 विद्यालयों की स्थिति देखी गईं। बिसवां उपजिलाधिकारी सर्वेश गुप्ता प्राथमिक विद्यालय गोधनी सरैया पहुंचे। यहां के शिक्षक खलील अहमद से उन्होंने राज्यपाल का नाम पूछा तो वह बगले झांकने लगे। उन्हें बच्चों के सामने ही कड़ी फटकार लगाई गई। वहीं रेउसा के प्राथमिक विद्यालय, भदमरा में शिक्षक ने एडवांस में हस्ताक्षर कर रखे थे। विद्यालय में एमडीएम मेन्यू के अनुसार नहीं मिला। महमूदाबाद उपजिलाधिकारी 8.30 बजे प्राथमिक विद्यालय कोरौली पहुंचे, जहां पर प्रधानाध्यापक जमील अहमद व सहायक अध्यापक संतोष कुमार अनुपस्थित मिले। यहां शौचालय टूटा मिला। यही हाल अधिकतर विद्यालयों में देखने को मिला। कई विद्यालयों में शौचालयों के पल्ले टूटे मिले। बिना सूचना के अध्यापक गैरहाजिर रहे। जिलाधिकारी ने रिपोर्ट के आधार पर अनुपस्थित रहने वाले 50 शिक्षकों का वेतन रोक दिया। वहीं शौचालय की स्थिति व विद्यालय के अंदर गंदगी पाए जाने पर संबधित सफाईकर्मी को निलंबित करने का निर्देश दिया है। सभी बीईओ से स्पष्टीकरण मांगा गया है।