सीतापुर। लाखों रुपये खर्च कर विकसित किए गए मॉडल तालाब अपनी रंगत खो रहे हैं। हालत यह है कि तालाबों में धूल उड़ रही है। गर्मी में प्यास बुझाने के लिए पशु-पक्षियों को भटकना पड़ रहा है। हालांकि सूखे तालाबों में पानी भरवाए जाने की कवायद प्रशासन ने शुरू की है। तालाबों का भौतिक सत्यापन कराया जा रहा है, पर यह कवायद कब अंजाम तक पहुंचेगी, कहा नहीं जा सकता।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले में 5397 (सामान्य व मॉडल) तालाब हैं। कुछ गिने-चुने तालाबों में भले ही पानी दिख जाए लेकिन हकीकत में अधिकतर तालाब सूखे पड़े हैं। जिन तालाबों में पानी की लहरें उठनीं चाहिए, वहां धूल उड़ रही है। नहरों का भी यही हाल है। तालाब व पोखर और नहरें सूखी होने की वजह से पशु-पक्षियों के सामने विकट समस्या उत्पन्न हो गयी है। तपती धूप में बदन झुलसने और गला सूखने पर जब पशु-पक्षी तालाबों का रूख करते हैं तो सूखे पड़े तालाब देख मायूस होते हैं। इस गंभीर समस्या से पशुपालकों को भी जूझना पड़ रहा है। पशुपालक अपने जानवरों की प्यास बुझाने के लिए हैंडपंप का सहारा ले रहे हैं। पशुपालकों के मुताबिक बेजुबान मवेशी यह तो बता नहीं सकते कि उन्हें प्यास लगी है। हम हैंडपंप से उन्हें कितनी बार पानी पिलाएंगे। अधिकारी से शिकायत करने के बाद भी कुछ नहीं हो रहा है।