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44 हजार मजदूर भुखमरी की कगार पर

Mon, 06 Jan 2014 05:44 AM IST
Sitapur
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सीतापुर। कड़ाके की ठंड में निर्माण कार्य लगभग बंद हो जाते हैं और खेतों में भी मजदूरों के लिए बहुत कम काम होता है। ऐसे में मजदूरों के लिए मनरेगा जीवन यापन करने का सबसे बड़ा सहारा साबित होती है। मगर प्रधानों और सचिवों की मनमानी और लापरवाही से जिले के 44,256 हजार मजदूर और उनका परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। जबकि मनरेगा के तहत सभी जॉब कार्ड धारकों को साल में सौ दिन काम देने का निर्देश है। एक तरफ जहां श्रमिक काम के लिए भटक रहे हैं वहीं दूसरी ओर जिन्हाेंने काम किया उन्हें भुगतान के लिए चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। बजट की कमी के कारण कई परियोजनाएं अधर में भी लटकी हुई हैं।
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महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत जॉबकार्ड धारकों को सौ दिन काम देने का निर्देश सरकार ने जारी कर रखा है। मकसद था गांव से रोजगार की तलाश में लोगों के पलायन को रोकना लेकिन सरकार की योजना फाइलों में ही कैद होती नजर आ रही है। बताते चलें कि वित्तीय वर्ष 2013-14 में मनरेगा में शासन से 11 करोड़ 50 लाख 26 हजार रुपये सीतापुर को बजट मिला था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सीतापुर के 19 ब्लॉकों में इस योजना में सात लाख 89 हजार 646 श्रमिकों ने अपने नाम दर्ज कराए थे। इसके सापेक्ष पांच लाख 23 हजार 642 श्रमिकों को जॉबकार्ड निर्गत हुए। मगर 44,256 मजदूर काम की आस ही लगाए रह गए। जबकि सौ दिन का रोजगार जिले भर में मात्र 2739 परिवारों को ही मुहैया कराया गया।
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