सीतापुर। प्रकाश पर्व दीपावली पर अगर आतिशबाजी न हो तो इस पर्व का मजा आधा-अधूरा रहता है। लेकिन यह कभी-कभी खतरनाक भी साबित हो जाती है। लेकिन इस बार घबराने की जरूरत नहीं है। इको-फ्रेंडली पटाखे आपको मजा तो देंगे ही, साथ ही दुर्घटना रहित भी होंगे। पटाखा बाजार ऐसे पटाखों से सजा हुआ है। इन पटाखों से न तो किसी दुर्घटना का अंदेशा है और न ही पर्यावरण के नुकसान का खतरा। हवा में लहराते यह पटाखे न तो ध्वनि प्रदूषण फैला रहे हैं और न ही वायु प्रदूषण को बढ़ा रहे हैं। इनमें चाइना निर्मित क्रैक-जैक, पॉप-पॉप और बूम पटाखों की खासी मांग है। इसके अलावा चाइना का ही पैराशूट पटाखा बच्चों को बेहद लुभा रहा है। एक सौ तीस रुपए की कीमत वाला यह पटाखा न तो तेज आवाज के साथ दगता है और न ही अपने पीछे धुंए का गुबार छोड़ता है। इसमें रखे कपूर में आग लगाने पर यह लहराता हुआ जमीन से ऊपर की ओर बढ़ता है। इसके अलावा चायना निर्मित चरखी, स्टैंड, डार्लिंग डांसर, बिन्नी, बंबू और अनार भी लोगों को बेहद लुभा रहे हैं। यह सभी पटाखे रंग-बिरंगी रोशनी छोड़ते हैं। पटाखा विक्रेता सत्यम गुप्ता ने बताया कि यह पटाखे खास तौर से बच्चों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं।
आतिशबाजी छुड़ाते समय तंग व सूती कपड़े पहने
आतिशबाजी छुड़ाते समय विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। तेज आवाज वाले विस्फोटक पटाखों से आंखों में जलन एवं संक्रमण की संभावनाएं हैं। बच्चों को तेज आवाज के साथ दगने वाले पटाखों के बजाए रंग-बिरंगी रोशनी छोड़ने वाली फुलझड़ी, अनार का प्रयोग अधिक करना चाहिये। स्वास्थ्य महकमे के अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डा. एसके चौहान कहते हैं कि विस्फोटक पदार्थों से सदैव दूर रहना चाहिये। पटाखा छुड़ाते समय ढीले-ढाले कपड़ों के बजाये तंग और सूती कपड़े पहनें। पटाखा छुड़ाते समय शिफॉन, सिल्क के कपड़े कदापि न पहनें। पटाखा छुड़ाते समय अपने चेहरे को पटाखे की ओर न रखें। इन सावधानियों के बावजूद भी यदि किसी कारण से शरीर का कोई अंग जल जाए तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं । जले हुये हिस्से में यदि तेज जलन हो तो भी बर्फ के पानी के बजाये साफ और ठंडे पानी से जलन वाले अंग को धोएं। इसके बाद तुरंत चिकित्सीय परीक्षण के लिए किसी प्रशिक्षित चिकित्सक से सलाह लें।
अप्रिय घटना से निपटने को स्वास्थ्य महकमा सजग
किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए स्वास्थ्य महकमा पूरी तरह से सजग है। सीएमओ डा. एस पी सिंह ने बताया कि आतिशबाजी के दौरान होने वाली किसी भी दुर्घटना से निपटने के लिए जिला अस्पताल सहित सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। स्वास्थ्य केंद्रों के अधीक्षकों व प्रभारी चिकित्साधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि बिना पूर्वानुमति के मुख्यालय न छोड़ें। चिकित्सालय की बर्न यूनिट को भी किसी अप्रिय घटना के लिए 24 घंटे चुस्त-दुरुस्त रहने के निर्देश दिए गए हैं। पटाखों के जलने से संबंधित दवाओं को सभी स्वास्थ्य केंद्रोें पर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करा दिया गया है।
अग्निशमन विभाग ने भी कमर कसी
अग्निशमन केंद्र के मुख्य निरीक्षक वीपी पांडेय ने बताया कि किसी भी दुर्घटना से निपटने के लिए अग्निशमन विभाग पूरी तरह तैयार है। जीआईसी मैदान पर लगाई गई पटाखा मंडी में अग्निशमन विभाग की एक बड़ी गाड़ी 24 घंटे मुस्तैद खड़ी रहेगी। इसके अलावा अग्निशमन केंद्र पर भी एक बड़ी और दो छोटी गाड़ियां 24 घंटे किसी भी घटना दुर्घटना से निपटने के लिए तैयार रखी गई हैं।