पहाड़ों पर पड़ी लाशों में सड़न तेज हो गई है। यहां फंसे लोग बीमार पड़ रहे हैं। गौरीकुंड, रामबाड़ा और दूसरे स्थानों पर फंसे तीर्थयात्रियों के फेफड़ों में संक्रमण हो रहा है।
उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज
कार्यवाहक महानिदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण डा.जेएस जोशी ने बताया कि केदारघाटी में शवों के दाह संस्कार के सारे इंतजाम कर दिए गए हैं। महामारी को फैलने से रोकने को ब्लीचिंग पाउडर छिड़का जा रहा है।
डीएनए सैंपल लिए जा रहे हैं
जोलीग्रांट अस्पताल से फोरेंसिक विभाग की टीम, 9 डाक्टर, पुलिस और प्रशासनिक अफसरों की टीम मौके पर पहुंच गई है। शवों से डीएनए सैंपल लिए जा रहे हैं। इसके बाद अगर शव का चेहरा साफ बचा है तो उसका फोटो भी सुरक्षित कर लिया जाएगा।
मंगलवार शाम तक दाह संस्कार शुरू होने की प्रशासन के पास सूचना नहीं आई थी। महानिदेशक जोशी ने बताया कि कनेक्टीविटी की समस्या बनी हुई है।
यात्रियों के पास गर्म कपड़े नहीं
उन्होंने बताया कि यात्रियों के पास गर्म कपड़े नहीं है। इससे फेफड़ों में संक्रमण की समस्या हो सकती है। इसके साथ ही प्रभावित क्षेत्रों को महामारी से बचाने के लिए बड़ी मात्रा में ब्लीचिंग पाउडर, चूना और फिनायल आज भी भेजा गया।
घाटी में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए युद्ध स्तर पर काम चल रहा है। कमिश्नर सुवर्धन ने बताया कि अभी प्राथमिकता के आधार पर बदरीनाथ में फंसे यात्रियों को निकाला जा रहा है।