तटीय क्षेत्र में दहशत, ग्रामीणों ने सुरक्षित ठिकानों के लिए किया कूच
सीतापुर /रेउसा। घाघरा नदी उफना रही है, नदी से उठती लहरें किनारों से टकराकर उसकी भयावहता को दर्शा रही हैं। कुछ इलाकों में पानी नदी के बाहर आ गया है तो कुछ जगहों पर वह तट को अपनी आगोश में समेट लेेने के लिए बेताब नजर आ रहा है।
घाघरा का उफान मारता पानी रेउसा क्षेत्र के करीब 20 गांवों के बेहद करीब पहुंच गया है। क्षेत्र के बाशिंदे इसे बाढ़ का अलर्ट मान रहे हैं। शायद यही वजह है कि तटीय क्षेत्र के बाशिंदों ने अपने झोपड़ों को समेटकर सुरक्षित स्थानों के लिए पलायन शुरू कर दिया है।
हालांकि स्थिति अभी विकट नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह से नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, उससे नदी के और विकराल होने की संभावना जताई जा रही है। इससे तटीय क्षेत्र के बाशिंदों में दहशत बरकरार है। खासकर चहलारी घाट के आसपास की आबादी बाढ़ की आशंका को लेकर बेहद दहशत में है।
उधर बैराजों से सवा दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिससे ग्रामीणों की आशंका को बल मिल रहा है। बुधवार की सुबह करीब 10 बजे घाघरा की लहरों के बीच करीब पांच नाव कटैला पुरवा घाट की तरफ आती नजर आई।
लहरों से संघर्ष करते हुए जब ये नावें किनारे लगीं तो देखा कि इन नावों में किसी पर बाइक, किसी पर साइकिल तो किसी पर अनाज व गृहस्थी का अन्य सामान लदा हुआ था। पूछने पर ग्रामीणों ने बताया कि वे घाघरा नदी के बीच टापू पर बसे पचीसा गांव में रहते हैं।
अब घाघरा का पानी तेजी से बढ़ रहा है। इससे वे घर का कीमती व जरूरी सामान लेकर टापू से निकलकर सुरक्षित ठिकानों की तरफ जा रहे हैं। पचीसा गांव के रामसिंह, दूजी, रामकुमार व रमेश ने बताया कि वे परिवार समेत टापू से निकलकर चहलारी चले आए हैं।
यहां पर झोपड़ी डालकर वे बस गए हैं। इसी तरह से अन्य ग्रामीणों ने बताया कि टापू पर नावें पर्याप्त हैं, लोग बाढ़ आने की संभावना को लेकर टापू छोड़ रहे हैं और सुरक्षित ठिकानों पर जा रहे हैं। इधर घाघरा की बाढ़ का पानी चहलारी पुल से आबादी की तरफ बढ़ चला है।
रेउसा क्षेत्र के कोनी, दुर्गापुरवा, ठेकेदार पुरवा, जैतहिया, मरेली, कटैला पुरवा, दर्जिन रेती, लोध पुरवा, फौजदार पुरवा आदि 20 गांवों के बेहद करीब आ गया है। गांवों के करीब मौजूद खेत बाढ़ की चपेट में आ गए हैं, नाले लबालब भर गए हैं, तट पर हिलोरे मारता पानी नदी से बाहर निकलने को बेताब नजर आ रहा है।
नदी का रौद्र रूप देखकर बाशिंदों का कहना है कि नदी का पानी तट के बराबर आ गया है। इससे बाढ़ की संभावना बढ़ गई है। कुछ जगहों पर नदी मामूली रूप से कटान भी कर रही है। इस क्षेत्र के बाशिंदों को फिलहाल आगे भी राहत मिलती नजर नहीं आ रही है।
वजह यह है कि बुधवार को शारदा व घाघरा बैराजों से 2,26,804 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जानकारों का कहना है कि जब यह पानी रेउसा क्षेत्र से गुजरेगा। तब निश्चित ही तटीय क्षेत्र में बाढ़ आ जाएगी। हालांकि प्रशासन नजर बनाए रखने की बात कह रहा है। वहीं तटीय क्षेत्र के बाशिंदे भी बाढ़ आने को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं।