मतपेटियों में कैद हुई सियासी दिग्गजों की प्रतिष्ठा
सीतापुर। मतदान के बाद प्रत्याशियों की किस्मत के साथ दिग्गजों की सियासी प्रतिष्ठा भी मतपेटियों में कैद हो गई। इनमें सर्वाधिक जिले की सात विधानसभा और चार लोकसभा सीटों पर काबिज भाजपा के दिग्गज भी शामिल हैं।
यही हाल प्रमुख विपक्षी दल सपा का भी है। निकाय चुनाव के यही नतीजे मिशन 2019 के लिए जोर लगा रहे स्थानीय सियासी दिग्गजों का कद भी तय करेंगे।
निकाय चुनाव के लिए पिछले करीब एक माह से चल रही हलचल बुधवार को तीसरे व अंतिम चरण के मतदान के बाद थम गई।
मतदान के साथ निकाय चुनाव में किस्मत आजमा रहे उम्मीदवारों के अलावा जिले के माननीयों की साख भी मतपेटियों में कैद हो गई है। खासकर भाजपा की प्रतिष्ठा सबसे ज्यादा दांव पर हैं।
नगर पालिका सीतापुर में प्रत्याशी राजेश शुक्ल को उतारने का दावा करने वाली भाजपा के लिए जिले के सभी 11 निकायों में यह चुनाव एक तरह से अग्नि परीक्षा हैं।
जिला प्रभारी कैबिनेट मंत्री रीता बहुगुणा जोशी, सांसद राजेश वर्मा व सदर विधायक राकेश राठौर के अलावा सेवता विधायक ज्ञान तिवारी की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है।
इन माननीयों ने भाजपा प्रत्याशियों को जिताने के लिए खूब पसीना बहाया है। नगर पंचायत सिधौली, हरगांव व नगर पालिका बिसवां और महमूदाबाद में भी सेवता विधायक ज्ञान तिवारी ने भाजपा को जिताने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है।
नगर पंचायत महोली में क्षेत्रीय विधायक शशांक त्रिवेदी जबकि नगर पालिका मिश्रिख में क्षेत्रीय विधायक रामकृष्ण भार्गव की प्रतिष्ठा दांव पर है।
मिश्रिख में विधायक रामकृष्ण की बहू सरला भाजपा प्रत्याशी हैं। यही कारण है कि चुनाव परिणामों को लेकर सत्ताधारी दल भाजपा में सबसे ज्यादा बेचैनी है।
उसके बाद मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी में हलचल है। सदर विधानसभा से चार बार विधायक रहे राधेश्याम जायसवाल नगर पालिका सीतापुर से अध्यक्ष का पद का चुनाव लड़ रहे हैं।
वहीं नगर पंचायत महोली में पूर्व विधायक अनूप गुप्ता व एमएलसी आनंद भदौरिया भी सपा उम्मीदवार सुमन देवी के पक्ष निकले थे।
इसके अलावा नगर पंचायत सिधौली में पूर्व विधायक मनीष रावत खुलकर सपा प्रत्याशी के पक्ष में निकले थे। शहर में कांग्रेस की साख भी कसौटी पर है।
यहां कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में पार्टी के कद्दावर नेता पूर्व एमएलसी पंडित राम गोपाल मिश्रा व हरीश बाजपेई भी जनसंपर्क कर समर्थन मांगते नजर आए है। यही वजह है कि नतीजों को लेकर कांग्रेस में भी बेचैनी देखी जा रही है।