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ओडीएफ की धीमी प्रगति से केंद्र ने रोकी रकम

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सीतापुर। गांवों में ओडीएफ की प्रगति धीमी है। यह खुलासा शासन स्तर पर स्वच्छ भारत मिशन कार्यों की समीक्षा में हुआ। समीक्षा में यह भी पता चला कि जियो टैगिंग का प्रतिशत कम है। यही नहीं प्रचार-प्रसार की गतिविधियों पर रकम खर्च करने में कंजूसी बरती जा रही है। प्रगति खराब होने पर केंद्र सरकार से मिशन को फंड भी नहीं मिल पा रहा है। मुख्य सचिव ने ओडीएफ कार्यों पर असंतोष जताते हुए डीएम को चिटठी लिखकर 31 अक्तूबर तक कार्य में सुधार कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं।
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प्रदेश व जिले को शीघ्र ओडीएफ करने के लिए मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव की ओर इस कार्य की प्रतिदिन समीक्षा की जा रही है। बावजूद इसके पंचायत राज विभाग सहित अन्य जिम्मेदार लापरवाह बने हुए हैं। इसी कारण जिले को ओडीएफ करने में बाधा आ रही है। इसे शासन ने गंभीरता से लिया है। इसके साथ ही मुख्य सचिव अनूप चंद्र पांडेय ने डीएम, अध्यक्ष जिला स्वच्छ भारत मिशन मैनेजमेंट कमेटी को पत्र भेजा है।

इसके जरिए कहा है कि शासन की समीक्षा में पाया गया है कि सीतापुर जिले के जिन गांवों को ओडीएफ घोषित किया गया है, उनमें से 1768 गांव जिला स्तर पर सत्यापित नहीं किए गए हैं। गांवों को ओडीएफ करने की प्रगति धीमी है। इसके अतिरिक्त आईईसी खर्च मात्र 14.39 प्रतिशत है। यह अत्यंत असंतोषजनक है। इस खराब प्रगति के कारण भारत सरकार से मिशन को फंड नहीं मिल पा रहा है।
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इससे प्रतीत होता है कि योजना का क्रियान्वयन व समीक्षा गहनता से नहीं की जा रही है। मुख्य सचिव ने डीएम से अपेक्षा की है कि वह व्यक्तिगत रूप से ध्यान देकर जिला स्तर पर शत-प्रतिशत गांवों का सत्यापन करें। प्रभावशाली आईईसी गतिविधियों का संचालन एवं न्यूनतम 60 प्रतिशत खर्च किया जाए। 90 प्रतिशत से अधिक जियो-टैगिंग कराने के लिए योजनाबद्ध रूप से गतिविधियां संचालित करें। हर हाल में इसकी रिपोर्ट 31 अक्तूबर तक उपलब्ध कराएं।
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