इससे मंगलवार को जल स्तर और बढ़ सकता है। हालांकि बाढ़ का पानी रविवार को ही जिले में दस्तक दे चुका है। करीब छह गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।
लहरपुर, बिसवां व महमूदाबाद तहसील क्षेत्र की सैकड़ों बीघा जमीन जलमग्न हो गई है। तटीय क्षेत्र में नदी कटान कर रही है। रविवार रात आठ मकान घाघरा में समा गए हैं।
बाढ़ की आशंका के मद्देनजर लोग सुरक्षित ठिकानों की तरफ पलायन कर रहे हैं। प्रशासन बैठक कर रणनीति बनाने में जुटा हुआ है। अभी भी तटीय क्षेत्र के नागरिकों को बाढ़ की चेतावनी नहीं जारी की गई है।
रेउसा व मारूबेहड़ क्षेत्र में घाघरा नदी का जल स्तर कम होता नजर नहीं आ रहा है। हालांकि बाढ़ की चपेट में आए निर्मल पुरवा, कोनी, फौजदार पुरवा, गोड़ियनपुरवा आदि करीब छह गांवों से नदी का पानी आगे नहीं बढ़ा है।
रविवार रात गोड़ियन पुरवा के शत्रोहन, वीरेश, रमजीवन, सहजू, देवी दयाल, बुधराम, ब्रजलाल व कमरू के घर नदी में समा गए हैं। इन घरों के गिरने से जनहानि की सूचना नहीं है।
लोग घाघरा का रौद्र रूप देखकर पहले ही घर छोड़कर पलायन कर चुके हैं। सभी सुरक्षित स्थानों पर अपना ढेरा जमा चुके हैं। क्षेत्र के चंद्रभाल पुरवा, परमेश्वर पुरवा, कोनी, जैतहिया, सिसैया बाजार आदि गांवों में नदी का पानी कटान कर रहा है।
तटीय क्षेत्र के ग्रामीण बाढ़ से दहशतजदा हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ आने के बाद भी प्रशासन की तरफ से कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। अभी तक प्रशासन ने बाढ़ की चेतावनी तक जारी नहीं की।
इस बाबत अफसरों को जानकारी भी है पर वे इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। घरों से पलायन कर रहे अधिकतर परिवारों ने क्षेत्र के रेउसा चहलारी मार्ग पर डेरा डाल रखा है।
क्षेत्र की अन्य सड़कें भी आबादी का रूप लेती जा रही हैं। तंबौर क्षेत्र में शारदा नदी भी पूरी तरह से उफान पर है। बैराजों से छोड़े गए पानी के क्षेत्र में पहुंचते ही नदी बाढ़ का रूप ले सकती है।
क्षेत्र के बड़रिया, बोधवा, बरेला, चंदीभानपुर, काशीपुर में शारदा नदी का पानी तट तक बढ़ने लगा है। इससे बाढ़ जैसे हालात हैं। इस क्षेत्र में भी तटीय इलाके में बसे परिवार घर व गांव छोड़कर पलायन कररहे हैं।