सीतापुर। जिम्मेदारों की गैर मौजूदगी भी स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा बन रही है। इसका खामियाजा इलाज व परीक्षण के लिए पहुंचने वाली गर्भवती महिलाओं को उठाना पड़ रहा है। सीएचसी में शाम व रात के समय अधीक्षक मौजूद नहीं रहते हैं। इस दौरान सबसे अधिक 68 फीसदी गर्भवती हायर सेंटर को रेफर की जा रही है। यह बात जिलाधिकारी की समीक्षा बैठक में उजागर हुई। इस पर नाराजगी जताते हुए जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर ने इस अनुपात को ठीक करने की जिम्मेदारी अधीक्षकों को सौंपते हुए 15 दिन बाद फिर से रिपोर्ट तलब की है।
संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए जिले की 20 सीएचसी पर विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इसके बावजूद बिना किसी ठोस कारण के गर्भवती को हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है। जिलाधिकारी की समीक्षा में सामने आया कि चिकित्सक ईमानदारी से अपनी ड्यूटी निर्वहन नहीं कर रहे हैं। इससे जिला महिला अस्पताल पर बोझ बढ़ रहा है। शाम के समय 34 व रात में भी 34 फीसदी गर्भवती रेफर होती हैं। यह वह समय होता है जब अधीक्षक अपनी ड्यूटी पर नहीं होते हैं। अगर दिन की बात की जाए तो 32 फीसदी गर्भवती ही रेफर हो रही हैं। इन आंकड़ों के बाद जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर ने सीएमओ डॉ. सुरेश कुमार को इसमें सुधार लाने के सख्त निर्देश दिए हैं। ताकि शाम व रात के अनुपात को कम किया जाए।
लहरपुर में रात में सबसे अधिक रेफर हो रहीं गर्भवती
रात के समय सबसे अधिक गर्भवती सीएचसी लहरपुर से रेफर की जा रही है। यहां से सबसे अधिक 63 फीसद महिलाएं रेफर हो रही हैं। इसके बाद सीएचसी गोंदलामऊ में 62 फीसदी, एलिया 51 फीसदी, मछरेहटा 50 फीसदी, महोली 49 फीसदी, कसमंडा 46 फीसदी, खैराबाद 44 फीसदी शामिल हैं। अगर शाम की बात की जाए तो सीएचसी रेउसा 50 फीसदी, तंबौर 42 फीसदी, मिश्रिख 40 फीसदी, हरगांव 39 फीसदी, महोली 37 फीसदी महिलाएं शामिल हैं। सीएमओ डॉ. सुरेश कुमार ने बताया कि सीएचसी से शाम व रात में अधिक मामले रेफर होने की बात सामने आई है। इस पर सभी सीएचसी अधीक्षकों को निर्देशित किया गया है कि वह इस समय को कम करें। 24 घंटे सीएचसी में ही मौजूद रहकर पूरी निगरानी करें।