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वायरल मैसेज ने शिक्षामित्रों में मचाई खलबली

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वायरल मैसेज ने शिक्षामित्रों में मचाई खलबली
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- 17 हजार रुपये मानदेय का था आदेश, तस्दीक में झूठा निकला मैसेज
सीतापुर। सोशल मीडिया पर मंगलवार को शिक्षामित्रों का मानदेय 17 हजार रुपये होने का मैसेज वायरल हो गया। कुछ ही पल में यह मैसेज तमाम ग्रुपों में चलने लगा। इसकी तस्दीक करने पर पता चला कि ये मैसेज पूरी तरीके से फर्जी है। हालांकि इससे काफी देर तक शिक्षामित्रों में खलबली मची रही। वे एक-दूसरे को फोन करके इस मैसेज की हकीकत करने में जुट रहे।
मालूम हो कि, सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द कर दिया था। जिसके बाद आंदोलित शिक्षामित्रों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 15 अगस्त तक इस समस्या का समाधान निकालने का भरोसा दिया था। इसी बीच मंगलवार को किसी ने एक मैसेज सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इसमें शिक्षामित्रों का मानदेय 17 हजार रुपये करने की बात कही गई और आदेश में बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव संजय सिन्हा के हस्ताक्षर भी थे। इसमें प्रदेश के सभी बीएसए को आदेशित किया गया कि वह शिक्षामित्रों को एक सप्ताह के अंदर अपने मूल विद्यालय में जॉइनिंग कराते हुए शासन को इसकी जानकारी भेज दें। इस मैसेज से शिक्षामित्रों में खलबली मच गई। वह इसकी सत्यता जानने के लिए अधिकारियों को फोन करने लगे। तस्दीक करने पर पता चला कि इस आदेश का वायरल हो रहा मैसेज पूरी तरीके से फर्जी है। शासन द्वारा इस प्रकार का अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
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बीएसए अजय कुमार का कहना है कि, शिक्षामित्रों के मानदेय को लेकर जो मैसेज सोशल मीडिया पर चल रहा है वह फर्जी है। शासन की तरफ से ऐसा कोई आदेश नहीं आया है।
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कल देंगे तहरीर
शिक्षामित्रों के आंदोलन की अगुवाई करने वाले धर्मेंद्र पांडेय का कहना है कि, ये मैसेज पूरी तरीके से फर्जी है। सचिव द्वारा अभी ऐसा कोई आदेश निर्गत नहीं किया गया है। इस मामले में वह बुधवार को कोतवाली में तहरीर देंगे। अगर शासन मानदेय निर्धारित करता है तो ये कदापि मंजूर नहीं होगा। सिर्फ शिक्षक पद ही चाहिए। इससे कम में समझौता नहीं करेंगे।
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