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50 हजार ने नहीं ली वैक्सीन की दूसरी डोज

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सीतापुर। जिले में कोरोना की दूसरी लहर का कहर और भयावह मंजर को अपनी आंखों से देखने के बाद भी वैैक्सीन की दोनों डोज लगवाने को लेकर लोग संजीदा नहीं हैं। टीकाकरण को लेकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। सरकार से लेकर सिस्टम तक प्रयास में हैं, लेकिन लोग हैं कि सुनने और मानने को तैयार नहीं है। मनमानी का खामियाजा ऐसे लोगों को तीसरी लहर में भुगतना पड़ सकता है। थर्ड वेब की चेतावनी और आहट के बाद भी जिले में करीब 50 हजार लोगों ने टीकाकरण की तारीख गुजर जाने के बाद वैक्सीन की दूसरी डोज नहीं ली है। ये चिंता की बात है।
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कोरोना की पहली लहर में संक्रमण से बचाव के लिए दवाई नहीं थी। सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क ही एकमात्र हथियार था, लेकिन सरकार ने लोगों की सेहत का ख्याल रखते हुए कोरोना वैक्सीन तैयार कराने में पूरी ताकत लगा दी। इसका असर भी दिखा। जिले में 16 जनवरी से टीकाकरण की शुरुआत हुई थी। सबसे पहले मेडिकल, पैरामेडिकल स्टॉफ, फिर फ्रंटलाइन वर्करों को वैक्सीन लगाई गई। इसके बाद 59 साल के ऊपर, फिर 45 साल के ऊपर बीमार लोगों को वैक्सीन लगाई गई। समय के साथ सरकार ने 45 प्लस और 18 से 44 साल वालों वैक्सीन दी।
सरकार से लेकर स्वास्थ्य महकमा लगातार टीकाकरण कराने पर फोकस कर रहा है। इसके पीछे वजह भी है। वैक्सीन ही कोरोना से बचाव के लिए एक महज हथियार है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि कोरोना की दूसरी लहर में अस्पतालों में बेड का संकट, सांसें बचाने के लिए एक-एक आक्सीजन सिलेंडर के लिए जद्दोजहद करते लोगों की तस्वीरें, श्मशान घाटों तक लाइन से जलती चिताओं की विचलित करने वाले उस खौफनाक मंजर और आने वाली तीसरी लहर की सुगबुगाहट के बाद भी जिले के लोग वैक्सीन की दूसरी डोज लेने में आगे नहीं आ रहे हैं। ये हम नहीं स्वास्थ्य महकमे के खुद आंकड़े इसकी तस्दीक कर रहे हैं।
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सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में 45 प्लस 9 लाख 69 हजार 919 लोगों को वैक्सीन लगाने का टॉरगेट है। लक्ष्य के अनुसार, 45 प्लस के 2 लाख 59 हजार 329 लोगों ने अभी तक कोरोना वैक्सीन की पहली डोज ली है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि दूसरी डोज 55 हजार 270 लोगों ने ली है। ये गुरुवार को जारी हुआ ताजा आंकड़ा है। टीकाकरण के नोडल अफसर एसीएमओ डॉ. पीके सिंह बताते हैं कि लक्ष्य के अनुसार पहली डोज लगने में ही लंबा समय लग सकता है, लेकिन दूसरी डोज लगवाने में लोगों की दिलचस्पी न लेना चिंता की बात है।
बताया कि 55 हजार से अधिक लोगों ने दूसरी डोज ली है। पहले 28 दिन में दूसरी डोज लगती थी। अब 84 दिन कर दिया गया है। इस वजह से कितने लोगों ने तारीख गुजरने के बाद भी दूसरी डोज नहीं ली, इसका सही आंकड़ा बताना थोड़ा मुश्किल है। 84 दिन का समय होने की वजह से बहुत लोगों का दूसरी डोज का समय अभी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन अनुमान के मुताबिक, 50 हजार से अधिक ही लोग होंगे, जिन्होंने वैक्सीन की दूसरी डोज तारीख निकल जाने के बाद भी नहीं ली है।
पहली डोज लेने में भी संजीदा नहीं
वैक्सीन की दूसरी डोज ही नहीं, पहली डोज लेने में भी लोग बढ़ चढ़कर हिस्सा नहीं ले रहे हैं। यही वजह है कि 9 लाख 69 हजार 919 लोगों का लक्ष्य होने के बाद अभी तक 2 लाख 59 हजार 329 को ही पहली डोज लग सकी है। टीकाकरण की इतनी सुस्त रफ्तार से स्वास्थ्य विभाग कितने दिनों में लक्ष्य को पूरा कर पाएगा, ये अभी कह पाना आसान नहीं है।
...तो इसलिए नहीं ले रहे दूसरी डोज
एसीएमओ डॉ. पीके सिंह बताते हैं कि कोरोना की पहली डोज लेने के बाद कुछ लोगों को बुखार आ गया। कई दिन बुखार से परेशान रहे। बाकी बहुत से लोगों को कोई दिक्कत नहीं हुई। बताया कि बुखार आने का मतलब कोई परेशानी नहीं है। कुछ को आता है कुछ नहीं, लेकिन बुखार आने की वजह से लोगों ने दूसरी डोज नहीं ली। लोगों से अपील है कि वह दूसरी डोज लेकर खुद को सुरक्षित करें।
स्वास्थ्य कर्मियों ने भी पहले नहीं ली दूसरी डोज
स्वास्थ्य महकमे के एक सूत्र की माने तो सीएमओ दफ्तर में तैनात कई ऐसे स्वास्थ्य कर्मी थे, जिन्हें पहली डोज में बुखार आ गया था। इस वजह से डर गए और दूसरी डोज नहीं ली, लेकिन बाद में माने गए और फिर दूसरी डोज लेकर खुद को सुरक्षित किया।
अब संजीदा दिख रहे पहली डोज लेने वाले
कोरोना वैक्सीन की पहली डोज लेने वाले लोग अब संजीदा दिख रहे हैं। वजह, कोरोना की तीसरी लहर की आहट सुनाई देने से अब वह लोग वैक्सीन लगवाने के लिए आगे आ रहे हैं, जिन्होंने दूूसरी डोज लेने से दूूरी बना ली थी। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि तीसरी लहर को देखते हुए लोगों में डर हुआ है।
कोरोना की दूसरी डोज लगवाने के लिए ब्लॉको को सीट भेजी गई है। सीएचसी अधीक्षक लोगों से फोन पर बात कर वैैक्सीन लगवाने की अपील कर रहे हैं। कोविड कमांड सेंटर से भी लोगों को कॉल की जा रही है। पहले लोग नहीं आ रहे थे, लेकिन तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए दूूसरी डोज लेने वालों की संख्या बढ़ी है। -पीके सिंह, एसीएमओ
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