सीतापुर। राशन कार्ड बनवाने का इंतजार कर रहे लोगों को अब फिर से कार्ड बनने की उम्मीद जग गई है। कारण यह है इस समय सत्यापन प्रक्रिया चल रही है। वहीं तमाम लोग अपने आप को खुद ही अपात्र बताकर राशन कार्ड सरेंडर कर रहे हैं। करीब आठ हजार लोगों ने पूर्ति विभाग आकर अपने कार्ड समर्पित कर दिए हैं, जबकि नये कार्ड बनवाने के लिए करीब 48 हजार लोग लाइन में लगे हुए है। इन लोगों के अब सत्यापन करने के बाद राशन कार्ड बनवाए जाएंगे। इसको लेकर पूर्ति विभाग ने कवायद शुरू कर दी है।
इस समय पात्र गृहस्थी व अंतोदय दो कैटेगरी में राशनकार्ड बनवाए जा रहे हैं। पूर्ति विभाग के मुताबिक जिले में शहरी व ग्रामीण इलाकों का कोटा फुल चल रहा था। इसकी वजह से नये लोगों के राशनकार्ड नहीं बन पा रहे है। विभागीय सूत्रों का कहना है जिले में तमाम अपात्र लोगों के राशनकार्ड बन चुके है। इसके कारण तमाम पात्र राशनकार्ड बनवाने के लिए भटक रहे है। अगर पिछले एक साल के आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो जिले में करीब 48 हजार नए लोगों ने राशन कार्ड बनवाने के लिए विभाग में आवेदन कर रखा है।
यह लोग रोजाना ऑफिस आकर राशन कार्ड बनवाने की प्रक्रिया के लिए जाते हैं। लेकिन कोटा फुल होने की वजह से इनके कार्ड नहीं बन पा रहे है। इस समय राशनकार्ड की सत्यापन प्रक्रिया चल रही है। इससे जिले में तमाम लोग अपने आप को खुद ही अपात्र समझकर राशनकार्ड समर्पित कर रहे है। पूर्ति विभाग के मुताबिक करीब आठ हजार लोगों ने अपने कार्ड समर्पित कर दिए हैं। यह लोगों की अच्छी पहल है कि वह दूसरों को मौका दे रहे हैं।
जब लोग खुद ही कार्ड समर्पित कर रहे है तो वेटिंग में लगे लोगों के राशनकार्ड बनवाए जाएंगे। इससे इन 48 हजार लोगों को अपने कार्ड बनने की उम्मीद जग गई है। अब वह पूर्ति कार्यालय आकर कार्ड बनवाए जाने के लिए प्रयासरत हैं। विभाग का कहना है एक सामान्य प्रक्रिया के तहत हर साल सत्यापन होता है। इस सत्यापन में भी तमाम लोग अपात्र मिल जाएंगे। इससे दूसरों को मौका मिलेंगा। डीएसओ संजय प्रसाद ने बताया कि राशनकार्ड बनवाए जाने की प्रक्रिया चल रही है। तमाम लोगों ने खुद ही अपने कार्ड समर्पित कर दिए हैं। इसलिए जगह खाली होने पर वेटिंग के लोगों की पात्रता की जांच करके राशनकार्ड बनवाए जाएंगे।
छह माह तक मिलेगी वेटिंग
जिले में करीब 48 हजार लोगों ने नये राशनकार्ड बनवाने के लिए आवेदन कर रखा है। ऐसे में विभाग का कहना है जिन लोगों के आवेदन छह माह के अंदर के हैं, उनकी वेटिंग ऑनलाइन प्रदर्शित हो रही है। इससे इन लोगों के जगह खाली होने पर कार्ड बन जाएंगे। जबकि छह माह से अधिक के आवेदन की प्रक्रिया स्वत: ही समाप्त हो जाएगी। इसलिए ऐसे लोग जो खुद ही अपने को राशनकार्ड का पात्र समझते है वह अपना आवेदन का समय देख ले।
अगर छह माह से अधिक का हो गया है तो इसे नये सिरे से आवेदन करना सुनिश्चित करें। डीएसओ ने बताया कि शहरी क्षेत्र में 64 फीसदी व ग्रामीण इलाके में 79 फीसदी जरूरतमंदों के राशनकार्ड बनवाने का कोटा तय है। जिले में शहरी व ग्रामीण दोनों इलाकों में यह कोटा फुल चल रहा था। इसकी वजह से नए लोगों के कार्ड नहीं बन पा रहे हैं। अब लोग समर्पित कर रहे है तो जगह खाली होने से दूसरे लोगों को मौका मिलेगा।