पिछली दिवाली में करीब सवा करोड़ के बिके थे पटाखे
सीतापुर। ज्योति पर्व पर इस बार समूचे जिले में तकरीबन डेढ़ करोड़ का पटाखा कारोबार हुआ। पिछले बरस यह कारोबार सवा करोड़ का हुआ था। लेकिन इस बार 25 लाख की बढ़ोत्तरी आंकी गई। ऐसे में अबकी दफा समूचे जिले में लोगों ने करीब डेढ़ करोड़ की आतिशबाजी छुड़ाकर जश्न मनाया।
धूमधड़ाका का जश्न मनाते के बाद लोग सुबह उठे तो हर तरफ धुंध नजर आई। इससे शुद्ध हवा में अच्छा खासा प्रदूषण दिखा। दीपावली रोशनी का पर्व है। इसलिए लोग इस त्योहार पर अपने घरों और प्रतिष्ठानों में बिजली की सतरंगी झालरों से सजावट करते हैं। दीये भी जलाते हैं। इनकी झिलमिल रोशनी से घरों व प्रतिष्ठानों की सजावट देखते बनती है।
यही नहीं रोशनी के इस त्योहार पर लोग जमकर आतिशबाजी भी छुड़ाकर खुशियों को और भी रंगीन बनाते हैं। अबकी दफा ज्योति पर्व को लेकर एक हफ्ते पहले शहरी और ग्रामीण अंचलों में पटाखा बाजार सज गया था। धनतेरस से आकाश में आतिशबाजी छुड़ाने का दौर शुरू हो गया था। यह सिलसिला भइया दूज पर भी जारी था।
पटाखा कारोबारियों की मानें तो इस बार दीपावली पर करीब डेढ़ करोड़ का पटाखा कारोबार रहा। जबकि पिछली बरस यह कारोबार सवा करोड़ का हुआ था। यानी अबकी दफा दिवाली में लोगों ने गत वर्ष की तुलना में 25 लाख अधिक की आतिशबाजी छुड़ाई।
खास बात तो यह है कि अपनी खुशियों को रंगीन बनाने में लोगों ने जमकर आतिशबाजी छुड़ाई, लेकिन सुबह जब लोग सोकर उठे तो हर तरफ वातावरण दूषित था। आतिशबाजी के धुएं की धुंध छाई थी। इससे समूचा वातावरण प्रदूषण युक्त था। बुजुर्गों को तो सांस लेने में भी दिक्कतें हो रही थीं।