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बुखार से पांच और मरे, 15 दिन में 26 की मौत

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सीतापुर। गोंदलामऊ विकासखंड में बुखार की चपेट में आकर चार लोगों की मौत हो गई। इन सभी का सीएचसी से इलाज चल रहा था। यह लोग कई दिनों से बुखार की चपेट में थे। इस इलाके में 15 दिन में बुखार से 26 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा सौ से अधिक लोग बुखार की चपेट में हैं। कोई प्राइवेट तो कोई सरकारी अस्पताल में उपचार करा रहा है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग इन मौतों को बुखार से नही, बल्कि अन्य बीमारियों से होना बता रहा है।
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गोंदलामऊ विकासखंड में बुखार का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस इलाके में 12 से अधिक गांवों के लोग बुखार की चपेट में आ चुके हैं। रोजाना नए-नए मरीज बढ़ रहे हैं। नटवल ग्रंट गांव निवासी विक्रम (12) को कई दिनों से तेज बुखार आ रहा था। पहले गांव आई टीम से बुखार की दवा ली। उसके बाद रविवार को अचानक तबियत बिगड़ गई। परिवारीजन फिर से यहां से दवा लाए। उसके बाद शाम को विक्रम की मौत हो गई।

वहीं, इसी गांव की प्रेमा (45) तीन दिन से तेज बुखार से परेशान थी। सीएचसी की टीम ने गांव आकर दवाई दी थी। इस दवा को खाने से प्रेमा को कोई विशेष फायदा नहीं हुआ। इनकी भी मौत हो गई। इसी विकासखंड की समवासी गांव निवासी रानी (55) को चार दिन से बुखार आ रहा था। पहले इन्होंने गांव में डॉक्टरों से इलाज कराया। जब फायदा नहीं हुआ तो प्राइवेट चिकित्सालय में इलाज कराया। लेकिन यहां के डॉक्टर भी प्रेमा को नहीं बचा सके। इनकी इलाज के दौरान मौत हो गई।
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इसी प्रकार पुन्नापुर गांव निवासी दिलीप (20) तेज बुखार से परेशान थे। लखनऊ ले जाते समय अटरिया में इनकी मौत हो गई। इस बुखार की चपेट में सबसे अधिक नटवलग्रंट गांव के पीड़ित हैं। यहां पर पिछले 15 दिन के अंदर नौ लोगों की मौत हो चुकी है।

वहीं, इस इलाके में 26 लोग मौत का शिकार हो गए हैं। उधर, बरेडा गांव की राजकुमारी (3), श्यामा देवी (42), कुसुमा (35), बबलू (32), पुष्पेंद्र (3), राधेलाल (55), अंशिका (6), पप्पी (35), शीतल (3), शिवप्यार ी(55) व लोधौरा में बाबू (52), दिवाकर (18), सरदार सिंह (8) सहित 100 से अधिक लोग गांव में बुखार से परेशान हैं।

उधर, सैदापुर निवासी मुन्नूलाल (60) की बुखार के चलते मौत हो गई। मुन्नूलाल पिछले कई दिनों से बुखार से पीड़ित थे। अचानक तबियत बिगड़ने पर परिजन मिश्रिख सीएचसी ले जा रहे थे। रास्ते में इनकी मौत हो गई।

सीएचसी अधीक्षक डॉ. धीरज मिश्र ने बताया कि जिन गांवों में बुखार होने की जानकारी मिलती है, वहां पर टीम भेजकर दवा वितरित कराई जा रही है। इन सभी मौतों को स्वास्थ्य विभाग बुखार से नहीं, बल्कि अन्य बीमारियों से होने की बात कह रहा है।

सीएमओ डॉ. आरके नैय्यर ने कहा कि नटवलग्रंट सहित आसपास के गांवों में पानी दूषित हो चुका है। यहां पर नए हैंडपंप लगवाने व टैंकर से पानी सप्लाई कराने के लिए जिलाधिकारी व क्षेत्रीय विधायक से अनुरोध किया जा चुका है। पानी दूषित होने की वजह से बीमारी फैल रही है। रोजाना गांव जाकर टीम मरीजों का चेकअप कर दवाएं वितरित कर रही हैं।

पानी के तीन नमूने हुए थे फेल
नटवलग्रंट में शुरुआत में जब बुखार से मौतें हुई थीं तो स्वास्थ्य विभाग ने गांव में लगे हैंडपंपों के पानी के नमूने जांच कराए थे। इसमें तीन हैंडपंपों के नमूने फेल हो गए थे। पानी बहुत ही दूषित हो चुका था। इन हैंडपंपों को बंद करा दिया गया था। इसके बावजूद मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। वहीं, 63 मरीजों के ब्लड के सैंपल लिए गए थे। लेकिन किसी भी सैंपल में मलेरिया व डेंगू नहीं मिला था। फिर भी मौतों का सिलसिला थम नहीं रहा है। इससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है।


डायरिया से मासूम की सांसें थमीं
रेउसा (सीतापुर)। थानगांव क्षेत्र के मेवड़ी गांव निवासी एक मासूम की उल्टी-दस्त के चलते रविवार को इलाज के दौरान सीएचसी रेउसा में मौत हो गई। वहीं, इसी गांव में कई नौनिहाल उल्टी-दस्त से पीड़ित हैं। डायरिया से बच्चे की मौत होने से ग्रामीणों मेें हड़कंप मचा है। अभी तक स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में नहीं पहुंची है।

थानगांव क्षेत्र के मेवड़ी गांव निवासी इदरीश का दो वर्षीय पुत्र नबी अहमद कई दिनों से उल्टी-दस्त से परेशान था। परिवारीजनों ने पहले स्थानीय चिकित्सकों से उसका इलाज कराया। जहां सुधार के बजाय हालत और बिगड़ने लगी तो परिवारीजन उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रेउसा लेकर पहुंचे। यहां पर डॉ. ललित वर्मा ने नबी अहमद का इलाज शुरू किया।

यहां पर भी जब फायदा नहीं हुआ तो उसे जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। घर वाले उसे जिला अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी नबी अहमद ने दम तोड़ दिया। परिवारीजनों का कहना है कि गांव में अन्य कई बच्चे भी उल्टी-दस्त से पीड़ित हैं। इस बारे में सीएचसी अधीक्षक डॉ. अनंत मिश्र का कहना है कि इसकी जानकारी नहीं है। टीम गांव भेजकर मामले की जांच कराई जाएगी।
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