नदी का रूप देख तटीय इलाकों में मचा हड़कंप
रेउसा/सीतापुर। पहाड़ों पर हो रही बारिश से जिले के गांजरी इलाके में बाढ़ आने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। हालत यह है कि आधा किलोमीटर दूर बहने वाला घाघरा नदी का पानी तट से आकर टकरा गया है। नदी के जलस्तर में भी तेजी से उफान आ रहा है। पानी तट के किनारों से महज तीन फीट नीचे ही बह रहा है।
यहां के बाशिंदों का कहना है कि जलस्तर में अगर इसी तरह से इजाफा होता रहा तो तटीय क्षेत्र में किसी भी समय बाढ़ आ सकती है। यही नहीं तटीय इलाके में बसे 65 गांवों पर भी खतरा मंडराने लगा है। उधर, शारदा व घाघरा बैराजों से सवा दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जो नदी के जलस्तर में और इजाफा लाएगा।
जबकि उत्तराखंड के बनबसा बैराज से डेढ़ लाख क्यूसेक के करीब पानी छोड़ा गया है, जो बुधवार को शारदा बैराज पहुंच जाएगा। ऐसे में नदियों के जलस्तर में कमी के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। बता दें कि कुछ दिन पहले रेउसा क्षेत्र के दुर्गा पुररवा, कोनी, जैतहिया आदि गांवों से घाघरा का पानी आधा किलोमीटर दूर बह रहा था।
इधर पहाड़ों पर हो रही बारिश व बैराजों से छोड़े जा रहे पानी की वजह से नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। नदी का पानी आधा किलोमीटर की दूरी तय करके किनारों पर आ गया है। वहीं जलस्तर में इस कदर उछाल आ रहा है कि नदी का पानी करीब तट के किनारों से महज 3 से 5 फीट नीचे बह रहा है।
नदी का रूप देखकर तटीय क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। तटीय क्षेत्र के बाशिंदे बाढ़ आने की आशंका से सशंकित हैं। उधर मंगलवार को घाघरा व शारदा बैराजों से 2,32,108 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इससे नदी के जलस्तर में और अधिक इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है।
वहीं पहाड़ों पर हो रही बारिश से भी राहत के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। उत्तराखंड से बुधवार को 1,45,708 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी शारदा बैराज पहुंचने के बाद आगे बढ़ेगा। इससे हाल फिलहाल नदी के जलस्तर में कमी आने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं।
नदी उफनाने से तटीय इलाके के जैतहिया, चहलारी, दुर्गा पुरवा, नगीना पुरवा, जंगल टपरी, ठेकेदार पुरवा, मरेली, कोनी, लाला पुरवा, दर्जिन रेती, कटैला पुरवा समेत करीब 65 गांवों में हड़कंप मचा हुआ है। इन गांवों के बाशिंदों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने से बाढ़ व कटान का खतरा बढ़ रहा है।
उधर, प्रशासन बाढ़ की हर स्थिति से निपटने को तैयार है। मंगलवार को प्रशासनिक अधिकारियों ने तटीय इलाकों का दौरा कर नदी का जलस्तर भी देखा। हालांकि प्रशासनिक अधिकारी अभी बाढ़ आने की संभावना से इंकार कर रहे हैं।
चहलारी मार्ग पर रेनकट की मुसीबत
सीतापुर से बहराइच जाने वाले मार्ग पर रेन कट मुसीबत बन सकते हैं। यदि जिम्मेदारों ने समय रहते ध्यान नहीं दिया, तो सीतापुर-बहराइच मार्ग पर सड़क भी धंस सकती है। हालत यह है कि रेउसा से लेकर चहलारी पुल तक सड़क किनारे रेन कटों की वजह से 3 से 5 फीट गहरी दरारें पड़ गई हैं। चहलारी घाट के निकट तो सड़क से सटकर करीब 5 फीट गहरी दरार साफ देखने को मिल रही है।
इससे सड़क कटने व धंसने की संभावना बढ़ रही है। यदि समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई तो सड़क धंस सकती है। इससे आवागमन प्रभावित हो सकता है। कुल मिलाकर सीतापुर-बहराइच मार्ग पर बारिश की वजह से खतरा मंडरा रहा है। हालांकि एसडीएम बिसवां ने रेन कटों को जल्द दुरुस्त कराए जाने की बात कही है।
बैराजों से छूटा अधिकतम पानी
घाघरा 123073क्यूसेक
शारदा बैराज 109035 क्यूसेक
बनबसा 145708 क्यूसेक
प्रशासन ने जारी किया अलर्ट
मंगलवार को एसडीएम बिसवां शशिभूषण राय ने रेउसा इलाके में तटीय क्षेत्रों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने घाघरा का जलस्तर देखा। साथ ही एसडीएम ने तटीय इलाके के बाशिंदों को सतर्क रहने को कहा। एसडीएम ने तटीय क्षेत्र के बाशिंदों को अलर्ट किया है कि जलस्तर बढ़ रहा है, इस वजह से नदी के किनारों से दूरी बनाए रहें। नदी में नाव लेकर चले तो सतर्क रहें, बच्चों को तटीय इलाके में खेलने न भेजे।
दुरुस्त किए जा रहे इंतजाम
बैराजों से काफी मात्रा में निरंतर पानी छोड़ा जा रहा है, इससे नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है। इसी तरह से जलस्तर बढ़ता रहा, तो बाढ़ आ सकती है। बाढ़ से निपटने के इंतजामों को दुरुस्त किया जा रहा है।
-शशिभूषण राय, एसडीएम बिसवां