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अब काश्तकार खेतों में लगा सकेंगे भरपूर पानी

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जिले में लगेंगे 18 नए राजकीय नलकूप, हर जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र में लगवा सकेंगे दो नलकूप
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सीतापुर। अब काश्तकारों की फसलें पानी के अभाव में नहीं सूखेंगी। उन्हें सिंचाई के लिए भरपूर पानी मिलेगा। इसके लिए सीतापुर जिले में 18 नए राजकीय नलकूप लगेंगे। यह नलकूप हर विधानसभा इलाके में दो-दो स्थापित किए जाएंगे। इनकी स्थापना के लिए नलकूप विभाग ने यहां के माननीयों से स्थल चयन के प्रस्ताव मांगें हैं।

जिले में काश्तकार अपने फसलों की सिंचाई नहरों व राजकीय नलकूपों से करते हैं या फिर किसान अपने निजी संसाधन से भी करते हैं। पर यहां के अधिसंख्य राजकीय नलकूप खराब हैं। नहरों में टेलों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। पर ये सुविधाएं जरुरत के समय नहीं मिल पाती है।
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इसे लेकर यहां के काश्तकार काफी समय से जनप्रतिनिधियों से नलकूप लगवाने की अपनी आवाजें बुलंद कर रहे थे। इसे देखते हुए शासन ने निर्णय लिया है कि प्रत्येक जनप्रतिनिधि अपने विधानसभा क्षेत्र में दो राजकीय नलकूप लगवा सकेंगे। इसके लिए स्थान चयन की आजादी जनप्रतिनिधि को होगी।

विधायक गांव चुनते समय यह ध्यान रखेंगे कि वह क्षेत्र असिंचित हो। नहर कमांड से बाहर हो। इस गांव में लघु व सीमांत किसानों की बहुतायत आबादी हो। साथ ही विद्युत लाइन की उपलब्धता हो। ऐसे गांव राजकीय नलकूप के लिए चयनित किए जाएंगे।

शासन के फरमान पर सीतापुर जिले की नौ विधानसभा क्षेत्रों में 18 नलकूप लगवाए जाएंगे। प्रत्येक विधानसभा में दो-दो राजकीय नलकूप स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए जिला प्रशासन ने माननीयों से स्थल चयन के प्रस्ताव मांगें हैं। इनकी स्थापना के बाद किसान आसानी से बिना किसी झंझावट के सिंचाई कर सकेंगे। यह पूरी कवायद जल्द पूरी होने की उम्मीद है।
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जिले में लगे हैं 755 राजकीय नलकूप
सरकारी आंकड़ों पर गौर फरमाए तो पाते हैं कि सीतापुर जिले में करीब 755 राजकीय नलकूप स्थापित हैं। इनमें 494 प्रथम खंड और 261 नलकूप द्वितीय खंड में आते हैं। बावजूद इसके दोनों खंडों में बहुतायत की संख्या में राजकीय नलकूप खराब पड़े हैं। ऐसा नहीं ये नलकूप एक दो महीने से खराब हैं। इन्हें फेल हुए बरसों हो चुके हैं। जिस कारण किसानों को खेतों में पानी लगाने में दिक्कतें उठानी पड़ती हैं।

सिंचाई संसाधन दुरुस्त कराने के लिए जिले में 18 नए राजकीय नलकूप स्थापित कराए जाएंगे। इसके लिए माननीयों से स्थल चयन के प्रस्ताव मांगें गए हैं।
-देव कृष्ण तिवारी, सीडीओ
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