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हाईवे पर 24 किमी. के सफर में 1400 गड्ढे

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द्वितीय बटालियन के पास लखनऊ-दिल्ली हाइवे पर अधूरा पड़ा फ्लाई ओवर का निमार्ण कार्य व नींव में भरा ? - फोटो : SITAPUR
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सीतापुर। जर्जर सड़क... उखड़ी बजरी... पग-पग पर जानलेवा गड्ढे, खतरनाक रेन कट और मोड़...। जी हां, ये किसी गांव या कस्बे का कोई लिंक मार्ग नहीं बल्कि एनएच 24 के बदहाली की कहानी है। सीतापुर से होकर गुजरा ये हाईवे देश-प्रदेश की राजधानी को सीधा जोड़ता है। हाईवे होने की वजह से किसी भी वक्त सड़क वाहनों से खाली नहीं रहती है। आम से लेकर खास (वीआईपी) तक सफर करते हैं, लेकिन इसकी बिगड़ी सूरत सिस्टम को मुंह चिढ़ा रही है। इस हाईवे पर चलने में लोग खौफ खाते हैं, लेकिन मजबूरी में सफर कर रहे हैं।
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रविवार को अमर उजाला टीम ने सीतापुर से महोली तक बदहाल पड़े हाईवे पर सफर किया। सीतापुर से महोली की दूरी करीब 24 किमी. है। इतनी दूरी के सफर में हमने जो महसूस किया, जो समस्याएं झेली... आइए आपको भी इससे रूबरू कराते हैं। रविवार दोपहर 12 बजे शहर को पार कर कांशीराम कॉलोनी पहुंचे। चंद कदम के फांसले पर एनएच 24 था। हमने महोली की ओर रुख किया।
थोड़ा आगे बढ़ते ही इलसिया पार्क को जाने वाले रास्ते के पास मोड़ पर सड़कें दो ओर बंट जाती हैं। एक महोली की ओर से सीतापुर, दूसरे सीतापुर से महोली की ओर। यहां काफी दूरी में सड़क जर्जर है। 200 से 300 स्क्वॉयर फिट की दूरी में कम से कम 150 से अधिक छोटे-बड़े गड्ढे होंगे। पिरई पुल तक पहुंचने तक रास्ते में करीब 400 मीटर की दूरी में 100 गड्ढे होंगे।
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पुल पार कर जैसे ही आगे बढ़ेंगे, फिर यहां सड़क दो भागों में बंट गई है। महोली की ओर जाने वाले रास्ते पर पुल के थोड़ा आगे करीब 200 स्क्वॉयर फिट की दूरी में कम से कम 100 गड्ढे होंगे। आगे बढ़ने पर पेट्रोल पंप तक करीब 250 मीटर तक पूरी सड़क ही जर्जर है। 250 मीटर की दूरी में 200 से अधिक गड्ढे होंगे। आगे बढ़ते ही फिर 50 मीटर तक पूरी सड़क जर्जर हैं। खगेसियामऊ तक रास्ता अच्छा है। पेपर मिल से पहले आपको विपरीत दिशा में दूसरी सड़क पर आना पड़ेगा।
बमुश्किल 100 मीटर ही चलेंगे, फिर घुमावदार मोड़ है और यहीं से शुरू होता है गड्ढों का सफर। यहां से कटीली गांव तक चलेंगे तो ढूूंढ़ नहीं पाएंगे कि गड्ढों में सड़क है या फिर सड़क में गड्ढे। 500 मीटर की इस दूरी में कम से कम छोटे-बड़े मिलाकर करीब 700 से 800 गड्ढे जरूर होंगे। इसमें कई तो ऐसे और इतने बड़ें है कि कार तक इसमें धंस जाती हैं। आगे बढ़ने पर नेरी और हेमपुर के थोड़ा पहले तक हाईवे ठीक है, पर हेमपुर चौराहे पर बने निर्माणाधीन ओवरब्रिज के दोनों ओर खतरनाक रास्ता है।
दाहिने ओर बजरी उखड़ी पड़ी है। बाएं करीब 100 मीटर की दूरी में पूरी सड़क उखड़ी है। हेमपुर क्रासिंग पार कर आगे बढ़ने पर रिछाही से पहले सड़क फिर से दो भागों में बंटी हैं। रिछाही पहुंचने पर चौराहे पर सड़क काफी खराब है। भुड़कुड़ा और उरदौली के पास हाईवे काफी जर्जर है। करीब 150 से अधिक गड्ढे होंगे। महोली तहसील के सामने सड़क काफी खराब है। कुसैला मोड़ और चड़रा तक हालात जुदा नहीं है। हमारा सफर और हाईवे की पड़ताल कुसैला मोड़ पर जाकर खत्म हुई।
24 किमी. की दूरी में करीब 1400 छोटे-बड़े गड्ढे हैं। ये पड़ताल बताती है कि सीतापुर से महोली का सफर खतरे से खाली नहीं है। जरा सी चूक हुई नहीं कि हादसा होना तय है। बेहतर सड़क होने पर सीतापुर से महोली तक जाने में 25 से 30 मिनट का समय लगता था, लेकिन अभी सवा से डेढ़ घंटे लग रहे हैं।
कटीली चौकी के सामने रास्ता जर्जर
नेशनल हाईवे पर रामकोट इलाके की कटीली चौकी के सामने से गुजरना जंग जीतने से कम नहीं है। वजह, पूरा रास्ता गड्ढों में तब्दील है। सड़क के पास चौकी के ठीक सामने मिट्टी डलवा दी गई है, जिससे बारिश होते ही पानी भर जाता है। इसके बाद हाईवे खराब होने की वजह से बड़े वाहन ट्रक, बस कच्चे में उतरे नहीं कि फंस गए। अक्सर ऐसा यहां होता है।
अभी बारिश और बढ़ाएगी परेशानी
पिछले दिनों लगातार हुई बारिश के बीच हाईवे पर बड़े वाहनों के गुजरने से सड़क की हालत और बदतर हो गई। जगह-जगह उखड़ गई है। गड्ढों में पानी भर गया है। पानी अब भी भरा हुआ है। मानसून आने पर बारिश और बढ़ेगी, ऐसे में इस हाईवे पर सफर करना और खतरनाक साबित होगा।
पानी भरे गहरे गड्ढों से लोग अनजान
सीतापुर से महोली के बीच सफर के दौरान रोजाना चलने वाले लोगों को तो अंदाजा रहता है, इसलिए वह बच निकलते हैं। लेकिन हाईवे पर अनजान लोगों को सफर करने में बड़ी दुश्वारियां झेलनी पड़ती है। बड़े-बड़े गड्ढों में पानी भरने से लोग थाह नहीं लगा पाते और उनके वाहन गड्ढों में जाते ही पलट जाते हैं या फिर फंस जाते हैं। कई लोग घायल भी हो चुके हैं।
2009 में शुरू हुआ था निर्माण
सीतापुर से बरेली तक नेशनल हाईवे को फोरलेन बनाने का काम 2009 में शुरू हुआ था। सबसे पहले एरा कंपनी ने काम शुरू किया था, लेकिन दीवालिया घोषित होने के बाद कंपनी फरार हो गई थी। इसके बाद काफी दिनों तक काम ठप रहा। अब नया टेंडर होने के बाद निर्माण कार्य फिर से शुरू हुआ है। करीब 12 साल होने को है, पर अभी तक काम पूरा नहीं हो सका है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण एनएचएआई ने हाईवे की सूरत संवारने की जिम्मेदारी तीन कंपनियों को दी है। फोरलेन बनाने की जिम्मेदारी राज कांस्ट्रक्शन कंपनी को कार्यदायी संस्था के रूप में शामिल किया गया है। ज्वाइंट वेंचर में लखनऊ की सिद्धार्थ कंस्ट्रक्शन और शाहजहांपुर की जगदीश सरन कंपनी है।
मार्च में फोरलेन बनाने का था लक्ष्य
तीनों कंपनियों को फोरलेन बनाने का टेंडर मिलने के बाद निर्माण कार्य पूरा करने की गाइडलाइन भी तय कर दी गई थी। मार्च 2021 तक काम पूरा करना था, अब जून भी बीतने को है। अभी तक काफी काम अधूरा पड़ा है। अब जिम्मेदार फिर से बारिश का रोना रो रहे हैं। ऐसे में वह पूरा काम अगले साल तक होने की बात कह रहे हैं। अगले साल यानी 2022 तक काम पूरा हो जाए ये भी बड़ी बात है।
सेहत के लिए हानिकारक है ये सफर
एनएच 24 का सफर सेहत के लिहाज से भी हानिकारक है। वजह, बारिश के बाद जब मौसम ठीक होता है और धूप निकलती है तो वाहनों के गुजरने पर तेज धूल उड़ती है, जो सीधे मुंह के रास्ते फेफड़ों तक पहुंचती है। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉक्टर जेएन सिंह बताते हैं कि धूप फेफड़ों के लिए काफी नुकसानदेह है। इससे अस्थमा होने का खतरा रहता है।
बरेली से सीतापुर के बीच फोरलेन बनाने का काम चल रहा है। 15 दिन पहले ही मैंने ज्वॉइन किया है। अभी 40 फीसदी ही काम पूरा हो सका है। सड़क और ओवरब्रिज अभी बनने बाकी हैं। बारिश की वजह से काम रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। अगले साल तक काम पूरा होने की उम्मीद है। जहां सड़क खराब है, उसे टीम को बोलकर सही कराऊंगा।
- अमित रंजन चित्रांशी, पीडी, एनएचएआई
रात में घर पहुंच गए तो नई जिंदगी
सीतापुर से महोली के बीच सफर कर रात में अगर आप इन दिनों सही सलामत घर पहुंच गए तो समझ लीजिए नई जिंदगी मिली है। सबसे बड़ी मुश्किल रात में झेलनी पड़ती है। बड़े-बड़े वाहन भी नहीं गुजर पाते हैं। चूके नहीं कि गाड़ी पलटते देर नहीं लगेगी। जान पर भी आ सकती है। सबसे अधिक समस्या कटीली चौकी के पास ही आती है।
नेता से लेकर अफसर तक हैं गुजरते
देश और प्रदेश की राजधानी को जोड़ने वाले हाईवे पर आए दिन सांसद, विधायक, मंत्री से लेकर बड़े-बड़े अफसरों की गाड़ियां गुजरती हैं। नेता और अफसर हिचकोले खाते हुए जाते हैं, लेकिन इसके बाद भी निर्माण कार्य में तेजी लाने के लिए उनकी ओर से कोई प्रयास नहीं किए गए है। यही वजह है कि काम बहुत ही सुस्त रफ्तार से चल रहा है।
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