राजनीतिक दलों व सामाजिक संगठनों ने कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष का किया ऐलान
सीतापुर। सियासी दलों व सामाजिक संगठनों की ओर से मिलने वाले समर्थन ने वकीलों के आंदोलन को नई धार दे दी है। सोमवार को कलमबंद असहयोग आंदोलन के दौरान बार एसोसिएशन सभागार में खासा उत्साह नजर आया।
सभा में बोलते हुए बार एसोसिएशन सीतापुर के कार्यकारी अध्यक्ष आशीष मिश्र ने कहा जिले के साथ ही प्रदेश के तमाम सामाजिक संगठनों ने अधिवक्ताओं को समर्थन देने का ऐलान किया है। उनका हम स्वागत करते हैं।
प्रदेश की वादकारी व्यवस्था प्रशासन की हठधर्मिता के कारण प्रभावित हो रही है। इन हालातों में प्रशासन को सौहार्दपूर्ण वातावरण में वार्ता के जरिए प्रकरण का सम्मानजनक हल निकालने में सहयोग करना चाहिए।
वरिष्ठ अधिवक्ता आनन्द माधव अवस्थी ने कहा कि जिला जज के आदेश के बाद भी मेडिकल बोर्ड द्वारा जेल में निरुद्ध अधिवक्ताओं की डॉक्टरी न कराया जाना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि जिला प्रशासन ने विशेषकर एसपी ने अधिवक्ताओं के साथ अमानवीय प्रताड़ना का काम किया है।
प्रशासन की ऐसी हठधर्मिता के कारण ही आज अधिवक्ता समुदाय के साथ सारा समाज खड़ा हो गया है। सभा को सचिव राममोहन पांडेय, विजय अवस्थी, दिनेश मौर्य, शिवबरन लाल यादव, गिरीश चन्द्र मिश्र, रामपाल मिश्र, मुकुल मिश्र, जावेद अहमद, अखिलेश खरे ने भी संबोधित किया।
वहीं, बार एसोसिएशन की पहल पर सोमवार को जिले के तमाम राष्ट्रीय एवं सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने अपनी उपस्थित दर्ज कराते हुए आंदोलन में अपना सहयोग दिया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष विनीत दीक्षित, राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश महासचिव ने समर्थन पत्र देते हुए हर कदम में साथ खड़े रहने की बात कही।
जमैय्यत उलेमा के जिलाध्यक्ष एवं राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित मस्त हफीज रहमानी ने समर्थन देते हुए कहा कि हर नागरिक का दायित्व है वह सत्य के साथ रहे। भारतीय मताधिकार मंच के अध्यक्ष पीएल कल्की ने अधिवक्ताओं को समाज का सजग प्रहरी, गरीबों, मजलूमों व बेजुबानों की आवाज बताते हुए कहा कि उनके साथ इस प्रकार का कृत्य अपमानजनक व निन्दनीय है।
शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राजकिशोर सिंह ने कहा कि सभी शिक्षक अधिवक्ताओं के साथ है। इण्डियन मेडिकल एसोसिएशन के सचिव डॉ. विनोद त्रिपाठी ने समर्थन देते हुए कहा कि वार्ता के तहत प्रशासन को हल निकालने की पहल कर देनी चाहिए।
कामरेड अनवर सिद्दीकी, गया प्रसाद, डॉ. बृज बिहारी ने भी पुलिस प्रशासन के कृत्य की घोर निंदा करते हुए कहा कि यदि शासन व प्रशासन ने अधिवक्ताओं को जबरन दबाने का प्रयास किया, तो सूनी सड़के आंदोलनों से भर उठेगी।
समर्थन की श्रृंखला में भगत सिंह अम्बेडकर विचार मंच की सुनीला रावत, भारतीय किसान मंच के जिलाध्यक्ष एवं श्रमजीवी पत्रकार संगठन के रोहित मिश्रा, हिन्दी सभा के रजनीश मिश्र, भारत परिषद के डॉ. वीरेंद्र आर्य, यूथ बिग्रेड जिलाध्यक्ष आकाश राय, मानवाधिकार एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव अनिल शर्मा, जिलाध्यक्ष संजय शर्मा, किसान एसोसिएशन के संजय सक्सेना ने भी अपना नाम दर्ज कराया।
महज 10 मिनट में छीन ली रोजीरोटी
पिछले कई बरसों से सीतापुर क्लब के निकट होटल चलाने वाले सरदार अमरजीत ने भी बार एसोसिएशन सभागार पहुंचकर प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई मानवाधिकार के विरुद्ध बताई। उन्होंने बताया कि मात्र दस मिनट में मेरी पूरी दुकान जबरन उजाड़ दी गई।
जिससे मेरे साथ पूरा परिवार सड़क पर आ गया है। पीड़ित ने बताया कि प्रशासन द्वारा इस संबंध में यदि पहले सूचना दी गई होती, तो हम अपनी रोजीरोटी का हल निकालने के साथ ही होटल के सामान को भी सुरक्षित कर पाते।