जिले के गांजरी इलाके में उफनाई नदियों से बाशिंदे भयभीत, रेउसा में आठ संपर्क मार्ग बाढ़ की चपेट में आए
रेउसा (सीतापुर)। जिले का गांजरी इलाका शारदा व घाघरा नदियों का कहर झेल रहा है। गुरुवार की रात एक पक्का मकान व एक छप्पर कटकर शारदा नदी में बह गए। जबकि तटीय क्षेत्र के किसानों की 60 बीघा खेतिहर भूमि भी कटकर नदी में समा गई।
यही नहीं घाघरा के उफनाने से रेउसा क्षेत्र में करीब आठ संपर्क मार्ग बुरी तरह से बाढ़ की चपेट में हैं। 10 गांवों के बेहद करीब बाढ़ का पानी पहुंच गया है। जबकि 20 गांवों पर बाढ़ के खतरा मंडरा रहा है।
इन दिनों शारदा नदी तटीय क्षेत्र के बाशिंदों की धड़कनें बढ़ा रही है। खासकर म्योड़ी छोलहा गांव के निकट शारदा नदी का कहर जारी है। जहां पर नदी जबरदस्त कटान कर रही है। शुक्रवार रात म्योड़ी छोलहा के निकट पटवरी का पक्का मकान व हरीलाल का छप्पर कटकर शारदा नदी में बह गया है।
गनीमत यह रही कि कटान के रुख को देखते हुए उन घरों में रहने वाले परिवार पहले ही घरों को खाली कर चुके थे। इस सूझबूझ से कोई जनहानि नहीं हुई। गांव के कई अन्य मकान भी कटान के मुहाने पर खड़े हैं। जहां आबादी में नदी का यह हाल है, वहीं खेतों को भी नहीं बक्श रही है।
गांव के राममूरत, प्रेमकांत, अजीज, गुलाम अली, सैफुद्दीन, रघुनंदन, ब्रजलाल, हामिद, किशोरी लाल आदि किसानों का करीब 60 बीघा खेत कटकर शारदा नदी में समा गई है। इधर जहां शारदा नदी तबाही मचा रही है, तो गोलोक कोड़न इलाके में घाघरा नदी का कहर जारी है।
उफनाती नदी का पानी रेउसा क्षेत्र के कोनी, दुर्गा पुरवा, परमेश्वर पुरवा, लोध पुरवा, कटैला पुरवा, जैतहिया, मरेली, नगीना पुरवा आदि गांवों के करीब हिलोरे मार रहा है। जिसके चलते आठ संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी के जद में आ गए हैं। कोनी गांव तो तीन तरफ से पानी से घिरा हुआ है।
करीब 10 गांव ऐसे हैं, जिनके बेहद करीब घाघरा का पानी बह रहा है। जबकि पूरे इलाके में 20 ऐसे गांव हैं, जिन पर इन दिनों बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। उफनाई घाघरा की बाढ़ का पानी तटीय क्षेत्र के खेतों में बर्बादी मचा रहा है।
करीब तीन हजार बीघे से अधिक की खेती इन दिनों बाढ़ के पानी में समाई हुई है। तटीय क्षेत्र की आबादी के लिए बरसाती नाले ही सबसे बड़ी मुसीबत का सबब बने हुए हैं। इन नालों से गांव में जमा बारिश का पानी जा तो नहीं रहा है। उल्टे नदी की बाढ़ का पानी गांव की तरफ बढ़ रहा है।
जहां नदियों का यह हाल है। वहीं शुक्रवार को शारदा व घाघरा बैराजों से 1,91,220 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। यह पानी आने वाले दिनों में भी राहत देता नजर नहीं आ रहा है। नदी का रौद्र रूप देख तटीय क्षेत्र के बाशिंदों में हड़कंप की स्थिति है।
आबादी से सजने लगी सड़क
मारू बेहड़ दुर्गा पुरवा मार्ग हो, रामलाल पुरवा मार्ग हो या फिर बहराइच हाइवे। इन दिनों ये सड़कें ही बाढ़ व कटान पीड़ितों के लिए वरदान साबित हो रही हैं। हालत यह है कि आबादी से चंद कदमों की दूरी पर घाघरा की बाढ़ का पानी हिलोरे मार रहा है, तो आबादी में बरसात का पानी जमा हो रहा है। ऐसे में ग्रामीणों को भय है, कि किसी भी वक्त तटीय क्षेत्र के गांव बाढ़ के पानी की चपेट में आ सकते हैं।
यही वजह है कि परिवारों ने सड़कों का रुख कर लिया है। कोई तिरपाल तान रहा है तो कोई पॉलीथिन तो कोई सड़क के किनारे ही छप्पर को छा रहा है। कुल मिलाकर हर कोई सड़कों पर ही आशियानों को दुरुस्त करने में जुट गया। सौ से अधिक परिवार इन सड़कों पर डेरा डाल चुके हैं, जबकि अन्य परिवारों का सड़कों पर आना जारी है।
प्रशासन के अधिकारियों ने देखा बचाव कार्य
इन दिनों शारदा नदी बसंतापुर व कोल्हुआपुर के निकट तेजी से कटान कर रही है। इससे गांव पर कटान का खतरा मंडरा रहा है। इन गांवों को बचाने के लिए गांवों के निकट ही स्टड बनाने का काम चल रहा है। शुक्रवार को सिटी मजिस्ट्रेट हर्षदेव पांडेय, एसडीएम शशिभूषण राय, पूर्णिमा सिंह आदि अधिकारी मौके पर पहुंचे।
अधिकारियों ने शारदा नदी के कटान का हाल देखा और ग्रामीणों से हाल पूछा। अधिकारियों ने स्टड निर्माण में लगे जिम्मेदारों को काम जल्द पूरा कराने को कहा। इस मौके पर अधिकारियों ने खम्हरिया गांव पहुंचकर शारदा तट का हाल देखा।
सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि खम्हरिया गांव के निकट तो काम पूरा हो गया है। बसंतापुर व कोल्हुआपुर ही बचे थे। इन गांवों को बचाने के लिए राहत कार्य युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का पूरा प्रयास है कि तटीय क्षेत्र के इलाके को कटान से बचाया जाए।
जलस्तर पर रखी जा रही नजर
नदियों के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। राजस्व टीमें तटीय इलाके में तैनात हैं। जो नुकसान हो रहा है, उसकी आख्या दे रहे हैं। पीड़ितों को दैवीय आपदा राहत कोष से मदद दी जाएगी।
-विनय पाठक, एडीएम