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108 गांव पानी से लबालब नहीं मिल रही मदद

Sat, 30 Jul 2016 10:36 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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नदी।
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बाढ़ की मुसीबत कम होने का नाम नहीं ले रही है। लहरपुर, बिसवां व महमूदाबाद के करीब 108 गांव बाढ़ की जद में हैं। शनिवार को घाघरा व शारदा बैराज से ढाई लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इससे मुसीबत और बढ़ जाएगी। हालात यह हैं कि अधिकांश घरों में राशन खत्म हो गया है। घरों में कई-कई दिनों से चूल्हे नहीं जले हैं। खासकर रेउसा इलाके में बाढ़ पीड़ितों का बुरा हाल है। 
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रेउसा के बाढ़ग्रस्त मरेली, ठेकेदार पुरवा, लोधपुरवा, जैतहिया, बैरागीपुरवा, पासिन पुरवा, गार्गी पुरवा, परमेश्वरदीन पुरवा आदि दो दर्जन से अधिक बाढ़ग्रस्त गांवों में प्रशासन की मदद नहीं पहुंची है। इन गांवों में घरों में राशन खत्म हो गया है। किसी के घर दो दिन से तो किसी के घर तीन दिन से चूल्हे नहीं जले हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी नावें छलावा साबित हो रहीं हैं।

किसी को जरूरी काम पड़ जाए, कोई बीमार पड़ जाए, तब नावें नजर नहीं आती हैं। लोगों ने चारपाई व तख्त को बांस गाड़ कर ऊंचा कर रखा है। वहीं बाढ़ का पानी दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है। अब घरों में करीब तीन फीट ऊंचाई तक पानी भर गया है। यह पानी छोटे बच्चों को डुबाने के लिए काफी है।
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कोनी पुरवा में प्रशासन नाव की मदद से पूड़ी व सब्जी पहुंचा रहा है। जबकि अन्य गांव अभी भी मदद की राह ताक रहे हैं। क्षेत्र के जिम्मेदार समाजसेवी व जनप्रतिनिधियों ने भी चुप्पी साध रखी है। मदद न मिलती देख पीड़ित क्षेत्र के जन प्रतिनिधियों को कोस रहे हैं। पीड़ितों का कहना है कि अधिकारी अगर हमारा दर्द नहीं समझ रहे हैं, तो जनप्रतिनिधियों को समझना चाहिए और पीड़ितों तक मदद पहुंचाने का इंतजाम करना चाहिए। पूरे बाढ़ग्रस्त इलाके में अभी तक मोबाइल शौचालय का भी इंतजाम नहीं किया गया है।

कोनी व गोड़ियन पुरवा गांव के निकट घाघरा नदी कटान कर रही है। अधिकांश हैंड़पंप बाढ़ के पानी में डूब गए हैं। जिसकी वजह से लोगों को पीने के लिए साफ पानी नहीं मिल रहा है। लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। लहरपुर क्षेत्र के हरखी बेहड़, फूलपुर, गोनिया, रतौली आदि गांव बाढ़ की चपेट में हैं। हालांकि प्रशासन इन गांवों में नावों से राहत पहुंचा रहा है। 

रामपुर मथुरा क्षेत्र में भी बाढ़ग्रस्त इलाके के हालात खराब होते जा रहे हैं। यहां जो 48 गांव बाढ़ की चपेट में हैं, उनमें जलस्तर बढ़ता जा रहा है। सबसे दयनीय हालत तो अंगरौरा ग्राम सभा की है। जहां पर कहीं तीन फीट पानी है तो कहीं पर चार से पांच फीट तक पानी भरा हुआ है।

सारे संपर्क मार्ग बाढ़ के पानी में समा गए हैं। लोगों को गंदे पानी में ही दिन व रात काटनी पड़ रही है। जिले के करीब 108 गांव बाढ़ की चपेट में है। इनमें करीब 85 गांव ऐसे हैं, जो बेहद संकट की स्थिति में हैं। पचीसा गांव में बाढ़ का पानी बढ़ रहा है। इससे टापू पर बसे लोगों पर भी संकट मंडराने लगा है। उधर, शारदा व घाघरा बैराज से शनिवार को 250737 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। 
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