सीतापुर। करीब 45 लाख की आबादी वाला सीतापुर जिला अग्निकांड के मामलों में बेहद संवेदनशील है। यहां हर साल करोड़ों की संपत्ति आग की भेंट चढ़ जाती है। दमकल विभाग के पास न पर्याप्त स्टाफ है और न ही आग बुझाने के संसाधन। मुट्ठीभर दमकल कर्मी व संसाधनों के सहारे विभाग आग की लपटों पर काबू पाने की कोशिश कर रहा है।
मैन पावर व संसाधनों की कमी से ही इस साल अब तक करोड़ों की संपत्ति राख हो चुकी है। सबसे अधिक नुकसान गांजरी इलाके में हर साल होता है। यहां आग की लपटों से छप्पर राख होत जाते हैं। इस क्षेत्र के लोग हर मौसम में नुकसान उठाते हैं। बारिश में बाढ़ और गर्मी में अग्निकांडों से जूझते हैं। ऐसे में कई लोग बेघर भी हो जाते हैं।
विभागीय जानकार बताते हैं कि एक जनवरी से दो मई तक जिले में 202 अग्निकांड हुए हैं। इनमें एक करोड़ 15 लाख 64 हजार 800 की संपत्ति राख हुई है। एक व्यक्ति व चार पशुओं की आग से जलकर मौत हुई है। हालांकि, कम संसाधन व स्टाफ के बाद भी दमकल टीमों ने जान हथेली पर रख तीन करोड़ 32 लाख 38 हजार 200 की संपत्ति बचाई है।
दमकल विभाग के पास संसाधनों का टोटा
दमकल विभाग के पास आग पर काबू पाने के लिए पर्याप्त संसाधन तक नहीं है। सीतापुर में मुख्यालय, सिधौली, महमूदाबाद, बिसवां, लहरपुर सहित पांच फायर स्टेशन हैं।
मिश्रिख व महोली अस्थाई फायर स्टेशन हैं। यहां नौ बड़ी व सात छोटी आग बुझाने वाली गाड़ियां हैं। दो फायर बुलेट गाड़ियां हैं। बस इन्हीं से दमकल विभाग को आग की लपटों से जूझना पड़ रहा है।
स्टाफ की है कमी, होमगार्ड के सहारे चलाते काम
आबादी के हिसाब से न ही दमकल विभाग के पास संसाधन हैं और न ही कर्मचारी। एक सीएफओ, चार में से महज दो सेकेंड अफसर हैं। एफएसओ के पांचों पद खाली हैं।
इसी तरह लीडिंग फायर मैन के 13 पदों के मुकाबले महज सात कर्मचारी हैं। महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले चालकों के यहां 13 पद हैं, लेकिन इसके सापेक्ष यहां महज चार चालक हैं।
उनमें से भी तीन बाहर से ड्यूटी के लिए बुलाए गए हैं। इसी तरह 95 फायर मैन की जगह 17 फायर मैन हैं। जिसके कारण होमगार्ड के सहारे काम चलाया जा रहा है।
संसाधनों व मैन पावर की कमी से शासन को अवगत कराया जा चुका है। उपलब्ध संसाधनों से आग बुझाने का काम किया जा रहा है। अग्निकांड की सूचना पर दमकल टीमें पहुंच कर आग बुझाती हैं।
- नरेंद्र प्रताप सिंह, सीएफओ