आठ घर कटकर घाघरा में समाए
घाघरा का कहर बरकरार
रेउसा (सीतापुर)। गांजरी क्षेत्र में घाघरा का कहर बरकरार है। नदी जहां उफना रही है, वहीं तटीय क्षेत्र में जमकर कटान कर रही है। गुरुवार रात तटीय क्षेत्र के आठ घर कटकर घाघरा नदी में समा गए। नदी के जलस्तर में बढ़ोतरी जारी है, जिससे खतरा टलता नजर नहीं आ रहा है। उधर, बैराजों से दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
घाघरा नदी इन दिनों म्योड़ी छोलहा से लेकर कटैला पुरवा गांव तक जबरदस्त कटान कर रही है। यह इलाका करीब 7 से 8 किलोमीटर का है। गुरुवार रात कटान की चपेट में आकर म्योड़ी छोलहा क्षेत्र के पासिन पुरवा निवासी रामधीरज, मुनेजर, श्रीपाल व सुकई के घर नदी में बह गए। दुर्गा पुरवा में बलराम व छेद्दू के घर कटकर नदी में बह गए हैं। गोड़ियन पुरवा में रामकुमार व प्यारेलाल के घर नदी की भेंट चढ़ गए हैं। जबकि तीनों गांवों में करीब 20 घर कटान के मुहाने पर हैं। इन घरों को परिवारों ने खाली करना शुरू कर दिया है। इतनी बर्बादी के बावजूद नदी के जलस्तर में किसी प्रकार की कमी देखने को नहीं मिल रही है। रामलाल पुरवा, दुर्गापुरवा व कोनी के करीब बाढ़ का पानी गांवों की तरफ बढ़ रहा है। चहलारी पुल के निकट मौजूद करीब 500 बीघा खेती बाढ़ की चपेट में आ गई है। खेतों में पानी भरा हुआ है, जिनके ऊपर नावें चल रही हैं। नई बस्ती, चहलारी गांवों के निकट भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है। उधर शारदा, घाघरा व बनबसा बैराजों से गुरुवार को 208036 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है।
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पचीसा पर संकट बरकरार
घाघरा के बीच टापू पर बसे पचीसा गांव पर संकट बरकरार है। टापू का एक हिस्सा बुरी तरह से बाढ़ की चपेट में आ गया है। इससे टापू के बचे हिस्से के भी बाढ़ की चपेट में आने का संदेह जताया जा रहा है। घाघरा का पानी है, कि नरमी बरतने को तैयार नहीं दिख रहा। जब जलस्तर बढ़ता है, तब टापू पर बाढ़ का खतरा रहता है, जलस्तर मामूली कम हुआ, तो कटान शुरू हो जाता है। घाघरा का भयावह रूप देखकर टापू पर मौजूद परिवार दहशत में हैं।
बैराजों से छोड़ा गया पानी
घाघरा बैराज 1,11,207 क्यूसेक
शारदा बैराज 39,395 क्यूसेक
बनबसा बैराज 57,434 क्यूसेक