कमलापुर (सीतापुर)। लखनऊ-मैलानी रेल लाइन के मध्य कमलापुर स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का अभाव है। यहां यात्रियों के लिए शुद्ध पेयजल भी नहीं है। बैठने के लिए बेंच नहीं है। यात्री प्रतीक्षालय और शौचालय में ताला लगे होने के कारण मुसाफिरों को भटकना पड़ता है। महज छह महीने में ही प्लेटफार्म की फर्श टूटने लगी है।
इस रूट पर आमान परिवर्तन की वजह से ठप किया गया रेल संचालन करीब ढाई साल बाद 10 जनवरी 2019 को बहाल किया गया था। अब इस रेलखंड पर बड़ी लाइन की ट्रेनें दौड़ने लगी हैं। लखनऊ-सीतापुर के बीच इस समय तीन पैसेंजर व एक एक्सप्रेस ट्रेन का संचालन किया जा रहा है।
सीतापुर के आगे मैलानी तक संचालन शुरू होने से ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जा सकती है। संचालित की जा रही सभी पैसेंजर ट्रेनों का कमलापुर स्टेशन पर ठहराव है। यहां से हर रोज तकरीबन एक हजार मुसाफिरों का आवागमन विभिन्न गंतव्यो के लिए होता है। दिनोंदिन यात्रियों की तादात बढ़ भी रही है।
इसके बाद भी स्टेशन पर बुनियादी सहूलियतों का अकाल है। प्लेटफार्म नंबर एक पर लगे दो इंडिया मार्का हैंडपंप में से एक खराब है। दूसरे हैंडपंप पर पक्की चौकी नहीं बनी होने से वह भी दूषित पानी उगल रहा है। एकमात्र शौचालय में ताला पड़ा होने से यात्री नित्यक्रिया के लिए पेड़ या झाड़ियों का सहारा लेने को मजबूर हैं।
यात्री प्रतीक्षालय में भी ताला जड़ा रहता है। अंदर गंदगी की भरमार है। ट्रेनों का इंतजार करने के लिए यात्री बाहर खड़े रहने को विवश होते हैं। वजह, पर्याप्त बेंचों का अभाव और बनाई गई बेंचों के तेज धूप में तपना है। महज छह महीने में ही प्लेटफार्म की फर्श जगह-जगह से टूटने लगी है। दो हैंडपंपों में एक खराब है।
ओवरब्रिज न होने से दिक्कतें
प्लेटफार्म एक से प्लेटफार्म नंबर दो पर जाने के लिए ओवरब्रिज नहीं है। लिहाजा, यात्रियों को एक प्लेटफार्म से दूसरे पर जाने के लिए काफी दिक्कतें उठानी पड़ती हैं। यात्री पूरा प्लेटफार्म क्रास कर अंतिम छोर से पटरी लांघकर आते-जाते हैं। इसमें महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों के चोटिल होने का खतरा भी बना रहता है।
खानपान का नहीं है स्टॉल
आमान परिवर्तन के लिए रेल संचालन बंद किए जाने से स्टेशन पर संचालित खानपान का स्टॉल भी हटा दिया गया। अब रेल संचालन शुरू हुए छह माह बीतने को हैं फिर भी यहां खानपान का स्टॉल संचालित नहीं किया जा सका है।
चाय-पानी व दूसरी रोजमर्रा की जरूरत का सामान भी नहीं मिल पाता है। वहीं, प्लेटफार्म नंबर एक पर सिर्फ एक प्रसाधन बना है। उसमें भी ताला पड़ा रहता है। नित्यक्रिया के लिए यात्रियों को खेत या बाग की ओर दौड़ लगाना मजबूरी है।