कलेक्ट्रेट कैंपस में सिटी मजिस्ट्रेट आफिस के बगल में लगा वाटर कूलर खराब है। एक तो वाटर कूलर गंदा है दूसरे उससे पानी भी ठंडा नहीं हो रहा है। दूषित पानी उगल रहा है जिसे आसानी से मुंह में लगाया नहीं जा सकता।
केस 2
विकास भवन के प्रथम तल पर पंचायत राज कार्यालय के समीप लगा वाटर कूलर शोपीस बना है। एक तो यह पानी ठंडा नहीं कर रहा है दूसरे कभी-कभार इसमें करंट उतर आता है। ऐसे में यह कूलर कर्मचारियों को झटका भी देता है।
केस 3
विकास भवन के तृतीय तल पर भी कमरा नंबर 325 के पास वाटर कूलर तो लगा रहा है मगर यह काफी समय से खराब पड़ा है। जिस कारण यहां रोज ही कर्मचारियों को पेयजल की किल्लत से दो-चार होना पड़ रहा है।
सीतापुर। गर्मी सिर चढ़कर बोल रही है। तेज लू के थपेड़ों से शरीर झुलसने लगा है। सड़कें भी पिघलनी शुरू हो गई हैं। इस मौसम में आम-आदमी को अगर कुछ चाहिए तो वो है दो बूंद शीतल जल।
सरकारी कर्मचारियों को भीषण गर्मी में प्यास बुझाने को शीतल जल भी नसीब नहीं हो रहा है। ये तस्वीरें कलेक्ट्रेट और विकास विभाग की हैं।
शहरी और ग्रामीण इलाकों की बदरंग सूरत सुधारने वाले सीतापुर के विकास महकमे की खुद की सूरत ही बदरंग है। यहां कई दर्जन सरकारी विभागों के अफसर-कर्मचारियों को गर्मी के मौसम में शीतल पेयजल उपलब्ध कराने को आधा दर्जन वाटर कूलर लगे हैं।
ये कूलर बरसों पहले लगवाए गए थे, मौजूदा वक्त में बमुश्किल से दो वाटर कूलर ही काम कर रहे हैं। बाकी वाटर कूलर शोपीस बने हुए हैं।
कुछ ऐसी ही हालत कलेक्ट्रेट परिसर में सिटी मजिस्ट्रेट आफिस के पास लगे वाटर कूलर का भी है, यह काफी समय से खराब है। यह भी पानी ठंडा नहीं कर रहा है।
खास बात तो यह कि अधिसंख्य विभागों में अफसर खुद के लिए तो पानी का कंटेनर मंगवा लेते हैं। उसी से अपना गला करते हैं लेकिन अपने अधीनस्थों की कतई परवाह नहीं है।
संबंधित अफसरों को निर्देशित किया जाएगा कि सभी वॉटर कूलरों की नियमित देखरेख करें। सभी को शुद्ध शीतल पेयजल उपलब्ध कराने के लिए उन्हें जिम्मेदार बनाया जाएगा।
-संदीप कुमार, मुख्य विकास अधिकारी