सीतापुर। स्थानांतरित वीडीओ द्वारा शौचालय मद में निकाली गई रकम की जांच के आदेश हुए थे। दस दिन में जांच रिपोर्ट देनी थी। बावजूद इसके डेढ़ माह बाद भी जांच शुरू नहीं की जा सकी है। इससे तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं कि कहीं मामला ठंडे बस्ते में न चला जाए।
गौरतलब है कि परसेंडी ब्लॉक के ग्राम विकास अधिकारी आलोक गोस्वामी ने बिना शौचालय बनवाए ही दो ग्रामसभाओं से 50 लाख रुपये निकाल लिए। तबादला होने के बाद भी ग्रामसभा बड़ागांव से एक ही तिथि में 10 लाख रुपये तीन सदस्यीय समिति से मिलकर निकाले गए जबकि शौचालय नहीं बने।
इसका खुलासा बीडीओ व एडीओ पंचायत की संयुक्त जांच में हुआ है। बाद में बीडीओ ने वीडीओ गोस्वामी के चार्ज में रहीं 15 ग्रामसभाओं की जांच के लिए 22 सितंबर को तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति को संबंधित ग्रामसभाओं में ग्रामनिधि प्रथम अंतर्गत चतुर्थ राज्य वित्त एवं 14वां वित्त आयोग व ग्रामनिधि-6 के तहत स्वच्छ भारत मिशन में लाभार्थियों को आवंटित शौचालय की धनराशि के आहरण एवं उसके सापेक्ष कराए गए कार्यों का स्थलीय एवं अभिलेखीय सत्यापन करना था।
समिति को निर्देश दिए गए थे कि वह 10 दिन में सुस्पष्ट सत्यापन रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। सत्यापन में यह भी परीक्षण किया जाना था कि क्या नियमों व मानकों का अनुपालन किया गया है अथवा नहीं। बावजूद इसके डेढ़ माह बाद भी जांच शुरू नहीं हो सकी।
एडीओ पंचायत रामपाल वर्मा ने बताया कि कार्य की व्यस्तता के कारण जांच नहीं हो सकी है। शीघ्र ही संबंधित ग्रामसभाओं की जांच करके रिपोर्ट बीडीओ के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी।
इन ग्रामसभाओं की होनी है जांच
गुराईपुर, परसेंडी, कैमहरा वजीरपुर, चांदपुर, उमरिया खानपुर, गोड़रिया, गौरिया कला, बड़ागांव, माहिद्दीनपुर, पकरिया धापूपुर, कसरैला, मदनापुर, टप्पा खजुरिया, अंगरासी व मोहरैया कला ग्रामसभा में ग्रामनिधि-1 तथा ग्रामनिधि-6 की धनराशि की निकासी एवं इसके सापेक्ष कराए गए कार्यों की जांच होनी है।
जांच समिति के सदस्य
बीडीओ परसेंडी हेमंत यादव ने ओमप्रकाश वर्मा एडीओ आईएसबी, रामपाल वर्मा एडीओ पंचायत व पुष्पेंद्र वर्मा जेई आरईडी को जांच अफसर नामित किया था।