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रोते बिलखते पहुंचे स्कूल, अभिभावक ने लालच देकर क्लॉस रुम तक पहुंचाया

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कुछ चहकते तो कुछ रोते हुए पहुंचे स्कूल
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सीतापुर। शैक्षिक सत्र के पहले दिन सरकारी विद्यालयों में नौनिहालों की उपस्थिति कम रही, वहीं प्राइवेट स्कूलों में इनकी तादाद अच्छी खासी रही। सत्र का पहला दिन होने की वजह से कुछ बच्चे हंसते-खिलखिलाते तो कोई रोते-बिलखते स्कूल पहुंचे।


अभिभावकों ने टॉफी, बिस्कुट का लालच देकर उन्हें स्कूल पहुंचाया। छुट्टी के समय अभिभावक स्कूल के बाहर पहले से ही खड़े रहे। शिक्षकों ने भी बच्चों का एक-दूसरे से परिचय कराकर दिन गुजार दिया।
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मार्च माह में सत्र समाप्त होने के बाद विद्यालयों में छुट्टी हो गई थी। छुट्टी के बाद एक अप्रैल को स्कूल खुले तो विद्यालयों में रौनक लौट आई। सुबह से ही सड़कों पर नौनिहाल स्कूल जाते दिखाई दिए। स्कूल जाने में सबसे अधिक दिक्कत छोटे बच्चों को हुई। वह माता-पिता को छोड़कर स्कूल नहीं जाना चाहते थे।


अभिभावक उनको रोते हुए स्कूल लाए। मगर कुछ बच्चे तो स्कूल के अंदर जाने को तैयार नहीं हुए। अभिभावकों ने उन्हें टॉफी-बिस्कुट का लालच देकर किसी तरह अंदर पहुंचाया। क्लास रूम में भी वह रोते रहे।


ऐसे में शिक्षकों ने उन्हें दुलार करके शांत कराया। खिलौना देकर उनको रोना चुप कराया। पहला दिन होने के नाते शिक्षकों ने कुछ पढ़ाया नहीं बल्कि बच्चों का एक-दूसरे से परिचय कराया। बच्चों ने भी खिलौने खेलते हुए समय गुजारा।


छुट्टी के समय अभिभावक पहले से ही स्कूल के बाहर खड़े मिले। जैसे ही बच्चे स्कूल के बाहर आए वे अपने माता-पिता को देखकर खुश हुए। कुछ ऐसा ही नजारा सहगल सिटी मांटेसरी स्कूल, स्टडीवेल पब्लिक स्कूल, सुमित्रा मॉडर्न स्कूल, एलपीएस, बचपन प्ले स्कूल सहित अन्य स्कूलों पर दिखाई दिया।



वहीं सरकारी विद्यालयों में बच्चों की संख्या अपेक्षा के अनुरूप नहीं रही। यहां भी नौनिहालों ने हाजिरी लगाई, एमडीएम का स्वाद चखते घर वापस लौट गए। परिषदीय विद्यालयों का नजारा कुछ बदला-बदला सा दिखाई दिया। गोंदलामऊ विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय महसुई में शिक्षिका श्वेता गुप्ता पढ़ाते हुए नजर आई।


श्वेता ने बताया कि पहले दिन नौनिहालों का एक-दूसरे से परिचय कराया। उनको रोजाना स्कूल आने व साफ ड्रेस पहनकर आने की बात कही। इसी प्रकार प्राथमिक विद्यालय कांशीराम कॉलोनी, लोहारबाग, प्रेमनगर में नौनिहाल पढ़ते हुए दिखाई दिए।


स्कूल तो खुले, गुरुजी भी पहुंचे। मगर बच्चों की तादाद कम थी। शिक्षकों का कहना है कि पहला दिन होने के नाते कम बच्चे आए। दिन प्रतिदिन इसमें इजाफा होता रहेगा।
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शासन ने भले ही पहले दिन ही कॉपी-किताबें वितरित करने का निर्देश दिया हो, मगर इसकी कवायद जिले में शुरू नहीं हो सकी। पहले दिन नौनिहाल पुरानी किताबें लेकर आए। उन्हीं से बच्चों को पढ़ाया गया। इसके अलावा नौनिहालाें को ड्रेस भी अभी नहीं मिली है। पहले दिन केवल एमडीएम खाकर बच्चे लौट गए।


बीएसए अजय कुमार का कहना है कि नए सत्र की शुरुआत हो गई है। पहले दिन सभी स्कूल खुले थे। जल्द ही नौनिहालों को कॉपी-किताबें व अन्य सुविधाएं दिलाई जाएंगी।
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