लहरपुर (सीतापुर)। कोतवाली क्षेत्र के टांडा कला गांव में तालाब के किनारे दो मगरमच्छ दिखने से लोगों में हड़कंप मच गया। इसके बाद तालाब के आसपास ग्रामीण एकत्र होने लगे। चहलकदमी बढ़ने से मगरमच्छ तालाब में चले गए। गांव के अंदर स्थित तालाब में मगरमच्छों की मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत है। सूचना पाकर पहुंचे वन कर्मियों ने तालाब के किनारे डेरा डाल दिया है।
कोतवाली क्षेत्र के टांडा कला गांव में हर रोज की तरह सब कुछ सामान्य था। इसी बीच गांव के अंदर स्थित तालाब के किनारे कुछ ग्रामीणों की दो मगरमच्छों पर निगाह पड़ी। मगरमच्छ तालाब के किनारे धूप में बैठे थे। मगरमच्छ देख भयभीत ग्रामीणों ने इसकी सूचना गांव वालों के साथ वन विभाग को दी। उधर, मगरमच्छ देखने लोग तालाब के किनारे पहुंचने लगे।
ग्रामीणों की चहलकदमी बढ़ने से मगरमच्छ तालाब में चले गए। गांव निवासी प्रमोद अवस्थी, अनुज, रामकुमार, सुमन, लाल, राम गुलाम आदि ने बताया कि तालाब गांव के अंदर होने से बच्चे खेलते-खेलते वहां पहुंच जाते हैं। जबकि तालाब के आसपास आवागमन भी बना रहता है। लिहाजा, तालाब में मगरमच्छों की मौजूदगी से किसी भी समय अनहोनी हो सकती है।
संभावित खतरे को लेकर ग्रामीण दहशत में हैं। फॉरेस्टर गिरीश पाल सिंह ने बताया कि बरसात के समय लालपुर के पास से निकलने वाली गोबरिया नदी में आई बाढ़ में बहकर मगरमच्छ गांव के तालाब में पहुंच गए होंगे। बाढ़ का पानी उतरने पर मगरमच्छ तालाब में ही रह गए। दोनों मगरमच्छ छोटे बच्चे हैं। जब तक तालाब के अंदर हैं, उन्हें पकड़ना मुश्किल है। सुरक्षा की दृष्टि से वन कर्मियों को तालाब के किनारे तैनात कर दिया गया है। जैसे ही मगरमच्छ बाहर आएंगे, उन्हें पकड़कर नदी में छोड़ दिया जाएगा।