नैमिषारण्य (सीतापुर)। पितरों के तर्पण के लिए देश-विदेश से यहां लोग करने आते हैं। नाभि गया के नाम से विख्यात प्राचीन नैमिष तीर्थ नगरी के काशीकुंड में श्राद्ध के दौरान पिंड दान कर स्नान किया जाता है। पितृपक्ष छह सितंबर से शुरू हो रहे हैं। लेकिन काशीकुंड अभी तक उपेक्षित है। परिसर के जल में काई की मोटी परत जम गई है। इसका जल स्नान करने लायक नहीं है। साफ-सफाई के अभाव में चारों ओर गंदगी फैली है। इन हालातों में यहां श्राद्ध के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी उठानी पड़ेगी। नाभि गया को यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए काशीकुंड नामक स्थान चक्रतीर्थ से पूर्व दिशा में स्थित पूर्ण प्राकृतिक सौंदर्य के मध्य शांत व पौराणिक तीर्थ है। मान्यता है, कि जब तक मनुष्य इस स्थान पर पिंडदान नहीं करता है तब तक उसके पितृ तृप्त नहीं होते हैं। अत: पितृों की तृप्ति की भावना लेकर यहां सुदूर प्रांतो से वर्ष पर्यन्त श्रद्धालु आते रहते हैं । पितृ पक्ष में यहां श्राद्ध की महत्ता कई गुना बढ़ जाती है। इसलिए इन दिनों यहां देश-विदेश से हजारों की संख्या में लोग श्राद्ध व पिंड दान करने आते हैं। पिंड दान की क्रिया में सर्वप्रथम सर मुडवाकर तीर्थ में स्नान करना आवश्यक होता है। इसके बाद अन्य क्रियाएं की जाती हैं। तीर्थ में इस कदर काई लगी है कि स्नान तो दूर जल के दर्शन ही संभव नहीं है। इस कारण श्रद्धालुओं को परिसर में लगे इण्डिया मार्का हैंडपंप से स्नान करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। अब 6 सितंबर से पितृ पक्ष शुरू हो रहे हैं। पूर्व जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी द्वारा काशी कुण्ड में जल आपूर्ति की समस्या को समाप्त करने के लिये पंप लगवाकर जल आपूर्ति की व्यवस्था की गई थी। अब उस पम्प का कोई अता पता नहीं हैं।
काशी कुण्ड की प्रमुख समस्याएं
-तीर्थ में जल भरवाने के लिये उपलब्ध संसाधनों बोरिंग एवं मोटर पम्प के बावजूद पम्प आपरेटर के अभाव में तीर्थ में जल की कमी बनी रहती है
-प्राकृतिक जल स्रोत के अभाव के कारण पानी में काई लगने से जल दूषित रहता है
-वहीं तीर्थ के जल निकासी हेतु बनाया गया नाला भी सफाई के अभाव में पूरी तरह चोक है। जिससे तीर्थ में गंदा पानी जमा होने से काई लगी रहती है
-तीर्थ निरंतर स्वच्छ बना रहे इसलिये यहां एक सफ ाई कर्मचारी की नितांत आवश्यकता है।
काशी कुंड का महत्व व मान्यताएं
भारत देश में हिदू धर्म की मान्यता के अनुसार तीन स्थानों पर गया कर्म किया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार गयासुर नामक राक्षस का जब वध हुआ तो उसके शरीर के तीन भाग हुए। ऊपर का भाग अर्थात मुख बद्रीनाथ में, नीचे का भाग यानी चरण भाग गया जी बिहार एवं मध्य भाग उदर नैमिषारण्य में गिरा। इसीलिए कपाल गया बद्रीनाथ में, चरणगया गया जी बिहार एवं नाभि गया नैमिषारण्य में होती है।
कराया जाए विकास
तीर्थ के महत्व और श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुये इस काशी कुण्ड तीर्थ का प्रमुखता से विकास कराया जाना चाहिये। -बलराम प्रसाद तीर्थ पुरोहित
सरंक्षण की आवश्यकता
तीर्थ पुरोहितों एवं ज्योतिषयों की जीविका का ये तीर्थ ही प्रमुख साधन है अत: जल्द ही इसके संरक्षण एवं जल प्रबंधन की आवश्यकता है। -संतोष दीक्षित कोटे
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आस्था पर कुठाराघात
देश विदेश से हजारों किलोमीटर का रास्ता तय करके श्रद्धालु यहां आते हैं और जब यहां तीर्थ की बदतर हालत देखते हैं तो उनकी आस्था पर कुठाराघात होता है। -राजेन्द्र ज्योतिषी
जीवन यापन कैसे होगा
हमारी जीविका का एक मात्र साधन यही तीर्थ है ंयदि तीर्थ उपेक्षित रहेगा तो यहा श्रद्धालु ही नहीं आयेंगे तो हमारे जैसे सैकड़ो पुराहितो का जीवन यापन कैसे होगा। -गिरधारी तीर्थ पुरोहित
टीन शेड की जरूरत
तीर्थ पर श्राद्ध कर्म कराने हेतु आने वाले यजमानो के लिये यदि यहां एक टीन शेड बन जाये तो यात्रियों को काफ ी सहूलियत हो जायेगी। -ललित ज्योतिषी
समुचित प्रबंध होगा
पितृ पक्ष शुरू होने से पहले ही तीर्थ स्थल पर सफाई एवं जल आपूर्ति का समुचित प्रबंध कर लिया जाएगा। -प्रेम प्रकाश, एसडीएम मिश्रिख