सीतापुर। बृज तीर्थ विकास परिषद मथुरा की तर्ज पर नैमिषारण्य का विकास होगा। इसके लिए नैमिषारण्य विकास परिषद के गठन को जल्द कानूनी मंजूरी मिल जाएगी।
जिलाधिकारी ने विकास परिषद के गठन का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया है। इस प्रस्ताव में नैमिषारण्य के प्रमुख तीर्थ स्थल, मां ललिता देवी, मिश्रिख, 84 कोसीय परिक्रमा मेले सहित 14 स्थानों को शामिल किया गया है।
जिलाधिकारी का कहना है उम्मीद है जल्द इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाएगी। इसके बाद विकास कार्यों का खाका तैयार किया जाएगा।
नैमिषारण्य तीर्थस्थल का पौराणिक महत्व है। यहां पर रोजाना देश-विदेश से श्रद्धालु आते है। वह मां ललिता देवी सहित विभिन्न मठ मंदिरों की पूजा अर्चना करते है।
अमावस्या के दिन लाखो की संख्या में भीड़ उमड़ती है। इस महत्व को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृज तीर्थ विकास परिषद मथुरा की तर्ज पर नैमिषारण्य विकास परिषद के गठन करने की घोषणा की थी।
इस घोषणा के बाद जिलाधिकारी ने विकास परिषद के गठन का प्रस्ताव बनाने के लिए सीडीओ की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की। इस कमेटी ने विकास परिषद के गठन का प्रस्ताव तैयार कर लिया है।
इस प्रस्ताव में मां ललिता देवी मंदिर सहित 14 स्थान शामिल किए गए है। जिलाधिकारी ने इस प्रस्ताव को पर्यटन विभाग को भेज दिया गया है। वहां से मंजूरी मिलते ही विकास परिषद का कानूनी रूप से गठन हो जाएगा।
ये स्थान हुए शामिल
मां ललिता देवी मंदिर, हनुमान गढ़ी, भूतेश्वर नाथ मंदिर, पंचमुखी हनुमान मंदिर, रुद्वावर्त मंदिर, सीताकुंड तीर्थ मिश्रिख, चक्रतीर्थ, व्यास गद्दी, सूतगद्दी, देव देवेश्वर मंदिर, दधीचि कुंड मिश्रिख, कैलाश आश्रम मंदिर एवं 84 कोसीय होली परिक्रमा मेला मिश्रिख तीर्थ व परिक्रमा पड़ाव को शामिल किया गया है।
पर्यटन की दृष्टि से होगा विकास
जिला प्रशासन का कहना है कि नैमिषारण्य विकास परिषद में नैमिषारण्य के साथ मिश्रिख को शामिल किया गया है। नैमिषारण्य व मिश्रिख का संपूर्ण विकास होगा।
इस परिषद के तहत जो भी योजनाएं बनेंगी, उन्हें नैमिषारण्य व मिश्रिख के भौगोलिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर बनाई जाएंगी। इससे यहां पर तमाम विकास कार्य कराए जाएंगे, जिससे इस स्थान को एक बेहतर पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा सके।